कोलंबो 21 मार्च। दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बढ़ते सैन्य तनाव के बीच श्रीलंका ने बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया है। उसने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपने यहां नहीं उतरने नहीं दिया। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने संसद से कहा, हमने मार्च की शुरुआत में अपने मटाला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो अमेरिकी जंगी विमानों को उतरने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया। राष्ट्रपति दिसानायके ने बताया कि जिबूती स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने से आने वाले इन विमानों ने 4 और 8 मार्च को श्रीलंका आने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने बताया कि ये 8 एंटी शिप मिसाइलों से लैस थे। राष्ट्रपति ने कहा है कि हम विभिन्न
दबावों के बावजूद अपनी तटस्थता बनाए रखना चाहते हैं। हम किसी के आगे नहीं झुकेंगे। पश्चिम एशिया के युद्ध ने हमारे सामने चुनीतियां पेश की है, लेकिन हम तटस्थ रहने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
अमेरिकी हमले में ईरानी युद्धपोत हुआ था क्षतिग्रस्त
श्रीलंका का यह कड़ा रुख ऐसे समय में आया है, जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं। विमान गौरतलब है कि 4 मार्च को गाले के पास अमेरिकी हमले में ईरानी युद्धपोत आइरिस देना एंटी शिप क्षतिग्रस्त हो गया था। इस घटना में 84 नाविकों की जान गई थी। यह जहाज भारत के मिसाइलों से विशाखापत्तनम में एक नौसेना अभ्यास के बाद लौट रहा था। इसके दो दिन बाद एक अन्य ईरानी जहाज आइरिस बुशहर ने कोलंबो बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति मांगी थी। श्रीलंका ने सुरक्षा कारणों से उसे त्रिकोमाली बंदरगाह की ओर मोड़ने का निर्देश दिया और वर्तमान में 204 कि हम विभिन्न ईरानी नाविकों को कोलंबो के पास नौसैनिक सुविधा में ठहराया गया है।
सर्जियो गोर से मुलाकात के अगले दिन सदन में दी जानकारी
राष्ट्रपति दिसानायके का यह बयान अमेरिकी दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत सर्जियो गोर के साथ हुई उनकी मुलाकात के एक दिन बाद आया है। अमेरिकी पक्ष की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस बैठक में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, बंदरगाहों को सुरक्षा और एक मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। हालांकि, अमेरिका के लड़ाकू विमानों को अनुमति न देकर दिसानायके की सरकार ने संकेत दे दिया है कि वह अपनी धरती का उपयोग किसी भी सैन्य संघर्ष या शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं होने देगी।

