परीक्षाओं में नकल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे व आत्महत्या करने वाले छात्रों को मुआवजा देने की मांग को लेकर पिछले एक माह से दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के धरने पर बैठे इसके प्रमुख अभिजीत दीपके के द्वारा गत दिवस शांतिपूर्ण संसद मार्च का आहवान किया गया। आहवान के समय लगभग छह हजार और बाद में लगभग एक लाख प्रदर्शनकारियों के जुटने से बताते हैं कि २० साल में पहलीबार कोई प्रदर्शन संसद तक पहुंच गया। परिणाम स्वरूप पानी की बौछारें हुई और लाठीचार्ज व पथराव भी हुआ। इतना बड़ा आंदोलन अन्ना हजारे निर्भया आंदोलन सीएए जैसा रुप लेता जा रहा था। मगर सोमवार को जो हुआ उससे थोड़ा जानकारों की निगाह में आंदोलन कमजोर हो सकता है मगर यहकहा जा सकता है कि पिछले १५ साल में दिल्ली में जितने आंदोलन हुए उनमें यह जन आंदोलन का रुप ले रहा था। सबकी अपनी अपनी राय और राग अलापा जा रहाहै। प्रदर्शन के दौरान ११८ पुलिसकर्मी व ६० प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर हैं तो दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ धर्मेंद्र प्रधान की मैराथन बातचीत हुई। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे यहां इस्तीफा देने की परंपरा नहीं है। दूसरी तरफ आंदोलनकारियों की मुलाकात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से हुई जिसमें प्रदर्शनकारियों ने तीन मांगे रखीं। खबर के अनुसार उन पर चर्चा का आश्वासन दिया गया। जैसा पिछले लगभग पांच दशक से देखता आ रहा हंू कि आंदोलन प्रदर्शन का आहवान तो कोई ओर करता है और उसके द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के प्रयास भी किए जाते हैं मगर जैसा कि हर बार होता है कुछ अन्य लोग जुड़ते हैं तो कई बिना वजह इसमें शामिल होते हैं और उसका नेतृत्व करने लगते हैं और ऐसा ही कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च में होने की बात सामने आ रही है। क्योंकि कुछ देर बाद हरसड्क पर प्रदर्शनकारी पत्थर फेंक रहे थे और लाठी खा रहे थे। जंतर मंतर से निकलते ही प्रदर्शन भ्ीाड़ में बदल गया जिससे सब अपनी मर्जी कर रहे थे। सुरक्षाकर्मियों के हाथ पांव फूल गए और लाठीचार्ज शुरू हो गया। जिससे पथराव भी हुआ। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोडकर वहां से हटाया लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं का कहना था कि अनशन खत्म हो गया वांगचुक के आग्रह पर लेकिन आंदोलन जारी रहेगा। कॉकरोच जनता पार्टी प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष को भी ऐसा आश्वासन नहीं मिला जिससे लगे कि उनकी मांगें पूरी की जा सकती है। अब ऐसी परिस्थिति तो नहीं दिखती कि केंद्र सरकार अपने मंत्री से इस्तीफा दिला सकती है लेकिन एक बात यह जरुर है कि मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवजे की बात मानी जा सकती है। गृहमंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभालते हुए पल पल की खबरें लेते रहे इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को जेपी नडडा से सुबह ११ ५० पर मिलने का मौका मिला और दस मिनट वार्ता हुई। वार्ता के परिणाम क्या होंगे यह ही समय बताएगा। सुबह आठ से शाम पांच बजे तक पुलिस प्रदर्शनकारियों में टकराव की स्थिति बनी जब कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर चले और जनपद चौराहा, वार मैमोरियाल विजय चौक होते हुए जैसे ही संसद के पास पहुंचे और अंदर घुसने की कोशिश की तो पुलिस ने अपना काम शुरु कर दिया। इससे संबंध खबरों से पता चलता है कि अच्छा खासा संघर्ष दोनों में हुआ।
मेरा मानना है कि पेपर लीक को लेकर शुरु हुआ आंदोलन और उग्र ना हो इसके लिए सत्ता विपक्ष के नेताओं को संयम बरतना होगा। भले ही तीन में से दो मांगे मानी जाए लेकिन वार्ता कर आंदोलन को यही रोकने का प्रयास करना चाहिए। क्योंकि गत दिवस संसद परिसर में सपा सांसद डिंपल यादव, प्रिया सरोज और धर्मेंद्र यादव ने कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में अपनी राय व्यक्त की। मुझे लगता है कि आसपास के देशों में कुछ वर्षो में जेन जी के सड़क पर उतरने से जो हुआ वैसा अपने यहां होने की उम्मीद नहीं है लेकिन युवाओं को हर मामले में प्रोत्साहित करने वाले पीएम मोदी को इस बारे में निर्णय लेकर युवाओं की भावनाओं पर मरहम लगाने की आवश्यकता है यही वक्त की मांग कही जा सकती है। यूपी के मंत्री संजय निषाद का कहना है कि बिना दिशा वाली मिसाइल के समान है कॉकरोच जनता पार्टी का मार्च। इनका यह कहना सही नहीं है लेकिन कुछ राजनीतिकज्ञों का कहना है कि निषाद को जितना समर्थन मिलता है उससे ज्यादा कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता संसद मार्च में पहुंचते। अगर वो शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहता तो
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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