नई दिल्ली/लोरिएंट (फ्रांस), 21 जुलाई (ता)। फ्रांस के लोरिएंट बंदरगाह से ‘तारा पोलर स्टेशन’ वैज्ञानिक प्रयोगशाला गत दिवस उत्तरी ध्रुव के लिए रवाना की गई। मुख्य उद्देश्य उत्तरी ध्रुव में ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को समझना है। मिशन का बजट लगभग 6 मिलियन यूरो (करीब 55 करोड़ रुपये) है।
एल्युमीनियम से बना विशाल तैरता इग्लू 12 वैज्ञानिकों और एक विशेष नस्ल के कुत्ते को लेकर 500 दिनों तक बर्फ की मोटी परतों के बीच पूरी दुनिया से अलग रहकर बहेगा। तारा ओशन फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक रोमेन ट्रबल ने कहा कि आर्कटिक एक ऐसा महासागर है, जिसका बहुत कम अध्ययन किया गया है। यह क्षेत्र बाकी महासागर की तुलना में तीन से चार गुना तेजी से गर्म हो रहा है। योजना के तहत अगले 20 वर्षों तक वैज्ञानिक हर दो साल में आर्कटिक से जरूरी सैंपल एकत्र करेंगे।
यह तैरती प्रयोगशाला अप्रैल, 2025 में बनकर पूरी हुई। यह आर्कटिक की समुद्री बर्फ से पैदा होने वाले भीषण दबाव को झेलने में सक्षम है। वहीं माइनस 52 डिग्री जितने तापमान में भी सुरक्षित रह सकता है।
यह स्टेशन प्राकृतिक रूप से बर्फ के बहाव के सहारे आगे बढ़ेगा। अगस्त के मध्य से यह बर्फ तोड़ने वाले जहाज की मदद से रूसी और नार्वेजियन तट के साथ आगे बढ़ेगा। फिर सितंबर में बर्फ की परतों के बीच जमने के लिए छोड़ दिया जाएगा। यह जमी हुई बर्फ के साथ 10 किलोमीटर प्रति दिन की औसत रफ्तार से बहते हुए उत्तरी ध्रुव को पार करेगा। लगभग 350 से 500 दिनों की यात्रा के बाद इसके साल 2027 के अंत तक ग्रीनलैंड और स्वालबार्ड के बीच स्थित फ्रेम स्ट्रेट पहुंचने की उम्मीद है।
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