लखनऊ 24 अप्रैल। एटीएस ने नोएडा से दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान बागपत के रमाला गांव निवासी 20 वर्षीय तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला अली खान और दिल्ली की पुरानी सीमापुरी स्थित सन लाइट कालोनी निवासी 20 वर्षीय समीर खान के रूप में हुई है। तुषार चौहान वर्तमान में मेरठ में कंकरखेड़ा स्थित वैष्णो धाम कालोनी में रह रहा था। आरोपितों के पास से 32 बोर की पिस्टल, पांच कारतूस व दो मोबाइल बरामद हुए हैं।
एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश ने बताया कि दोनों आरोपित पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ पाकिस्तानी गैंग्सटर शहजाद भट्टी, आबिद जट व पाकिस्तानी कट्टरपंथी यू-ट्यूबर्स के लिए काम कर रहे थे। आइएसआइ के निर्देश पर पाकिस्तानी गैंग्सटर ने आरोपितों को संवेदनशील स्थलों की रेकी कर प्रभावशाली लोगों के घरों पर हैंड ग्रेनेड फेंकने का लक्ष्य दिया था। आरोपितों ने स्लीपर सेल का भी गठन किया था। पाकिस्तानी गैंग्सटर ने इन्हें आतंकी वारदात को अंजाम देने से पहले 50 हजार रुपये और काम होने के बाद 2.5 लाख रुपये देने का वादा किया था।
आरोपितों ने एटीएस को बताया कि पाकिस्तानी गैंग्सटर के बहकावे में आकर इस्लाम धर्म के प्रति उनका झुकाव बढ़ गया था। तुषार ने शहजाद भट्टी के नाम से इंस्टाग्राम पर आइडी भी बनाई थी, जिसे संबंधित कंपनी ने बंद कर दिया। उसने दोबारा आइडी बनाकर शहजाद भट्टी से संपर्क किया। उसके साथ उसकी वायस, वीडियो व पीटीटी (पुश टू टाक) के जरिये बात होती थी।
प्रभावशाली लोगों के घर हैंड ग्रेनेड फेंकने व जान से मारने का लक्ष्य दिया था। इसके लिए अत्याधुनिक हथियार भी उपलब्ध कराए थे। दुबई के रास्ते पाकिस्तान बुलाने का लालच दिया था। तुषार काफी समय से मेरठ स्थित कंकरखेड़ा में वैष्णो धाम कालोनी में रह रहा था और समीर खान के साथ मिलकर बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। शहजाद भट्टी ने उसे दीवारों पर टीटीएच (तहरीक ए तालिबान हिंदुस्तान) लिखने और अपने साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने का लक्ष्य दिया था।
दोनों आरोपितों ने पाकिस्तानी गैंगेस्टर के कहने पर कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए कुछ प्रभावशाली लोगों को जान से मारने की धमकियां भी दी थीं। इस कॉल पर पाकिस्तानी हैंडलर्स भी जुड़े रहते थे। एटीएस शुक्रवार को दोनों आतंकियों को रिमांड पर लेकर और पूछताछ करने के लिए अदालत से अनुरोध करेगा।
एटीएस के सूत्रों के अनुसार दोनों आरोपित आईएसआई एजेंट मेजर हमीद, मेजर इकबाल व मेजर अनवर के साथ भी संपर्क में थे। इन्हें आईएसआई के एजेंटों द्वारा आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए रकम और पिस्टल भी उपलब्ध कराई गई थी। साथ ही वारदात को अंजाम देने के लिए मोटी राशि देने का लालच भी दिया गया था।

