वेनेजुएला 25 जून। वेनेजुएला में दो ताकतवर भूकंप से तबाही मच गई है। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में बुधवार शाम 6.34 बजे 7.2 और 6.35 बजे 7.5 तीव्रता के दो झटके आए। उस समय भारत में गुरुवार तड़के 3.34 और 3.35 बजे थे।
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप से 10 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने की 44% आशंका है। वहीं, 30% आशंका एक लाख लोगों के जान गंवाने की भी है। अब तक 32 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 700 से ज्यादा घायल हैं।
दोनों भूकंप राजधानी कराकस से करीब 290 किलोमीटर पश्चिम में आए। इससे कई शहरों में इमारतें गिर गईं या खतरनाक तरीके से झुक गईं। कराकस एयरपोर्ट की छत का कुछ हिस्सा गिर गया। इससे धूल का गुबार उठता दिखाई दिया।
वेनेजुएला में 2 विनाशकारी भूकंप के बाद कम से कम 20 और झटके आए हैं। राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि इन भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित देश का उत्तरी तटीय इलाका है। इस बीच भूकंप की वजह से अंतरिम राष्ट्रपति ने देश को संबोधित करते हुए ट्रेन और मेट्रो सेवाओं को कुछ समय के लिए बंद करने का ऐलान किया है। स्कूलों की कक्षाओं को भी सस्पेंड कर दिया गया है। एयरपोर्ट को भी बंद किया गया है।
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने कहा है कि बचाव के दौरान जिंदा बचे लोगों को मलबे से निकालना अभी प्राथमिकता है। उन्होंने पूरे देश से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे आगे आएं और बचाव में मदद करें। राष्ट्रपति डेल्सी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मदद का ऑफर देने के लिए धन्यवाद कहा है।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला में तत्काल खोज और बचाव दल को भेज रहा है। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में हम साथ हैं। वहीं उनके डेप्युटी क्रिस्टोफर लंडाऊ ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के साथ संपर्क में है। वेनेजुएला में आए भूकंप में अब तक कम से कम 32 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, वहीं 700 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। US Geological Survey का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 10 हजार से लेकर 1 लाख तक हो सकती है।
वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप का इतना ज्यादा खौफ हो गया है कि लोग खुले में रात बिता रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि और झटके आ सकते हैं या भूकंप की वजह से डैमेज हुई इमारत अचानक से गिर सकती है। कई लोग अपनों के बारे में जानकारी ले रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से कहा कि वे अपने घरों को तब तक छोड़ दें जब तक कि नुकसान का अनुमान न लगा लिया जाए। वहीं खोज और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।

