मसूरी 08 जून। मसूरी में यातायात और पार्किंग की समस्या अब बेहद गंभीर हो चुकी है। दिल्ली- देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवेके चालू होने के बाद से सप्ताहांत (वीकेंड) ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी पर्यटकों और वाहनों का दबाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। विडंबना यह है कि इस विकराल होती समस्या के निराकरण के लिए न तो नगर पालिका परिषद और न ही राज्य सरकार ने अब तक कोई ठोस और धरातलीय पहल की है।
किंक्रेग में बनाई गई करोड़ों रुपये की मल्टीलेवल पार्किंग भी वर्तमान में फेल साबित हो रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह पार्किंग मुख्य शहर (मालरोड) से करीब दो किलोमीटर से भी अधिक की दूरी पर स्थित है। पर्यटकों को मुख्य शहर तक लाने के लिए प्रशासन द्वारा के शुरू की गई शटल सेवा भी जमीनी स्तर पर पूरी तरह असफल रही है, जिसके कारण पर्यटक यहां वाहन खड़े करने से कतराते हैं। शहर का सबसे व्यस्ततम क्षेत्र ‘गांधी चौक’ यातायात के लिहाज से सबसे बड़ा बाटलनेक बना हुआ है। पूर्व में यातायात के सुगमीकरण के लिए इस चौक का चौड़ीकरण किया गया था, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण उस खाली जगह का पूरा लाभ अब रेंटल दुपहिया संचालक उठा रहे हैं।
आंकड़ों की जुबानी
जरूरत 5000 की, जगह केवल 2300 की एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में मसूरी में केवल 2300 वाहनों को पार्क करने की क्षमता उपलब्ध है, जबकि सीजन के दौरान प्रतिदिन औसतन 5000 से अधिक वाहनों को खड़ा करने के लिए जगह की जरूरत होती है। ऐसे में पर्यटकों की आमद बढ़ने पर वाहन सड़कों पर ही फंस रहे हैं। वर्तमान में मसूरी में लगभग 350 बड़े होटल और करीब 300 गेस्ट हाउस व होम- स्टे संचालित हैं। कुछ गिने-चुने नामचीन होटलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर के पास पर्यटकों की आवश्यकता के अनुसार वैध पार्किंग स्पेस उपलब्ध नहीं है।

