जौनपुर, 23 जनवरी। जौनपुर में इस वक्त हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इंसानियत और समझदारी की सारी हदें पार कर देने का मामला सामने आया है। जिस कत्ल के प्रय़ास के मामले में पुलिस बदमाशों की तलाश के लिए ताबड़ तोड़ कार्रवाई कर रही थी। पुलिस की जांच में मामला फर्जी निकला है. बदमाशों द्वारा नही बल्कि खुद युवक ने खुद को विकलांग साबित करने के लिए अपना ही पैर को ग्लैंडर मशीन से काट डाला, जिससे मेडिकल और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके। मामला लाइन बाजार थानाक्षेत्र के खलीलपुर का है। यहां के रहने वाले सूरज भास्कर (24) पर आरोप है कि उसने बाएं पैर का पंजा काटकर खुद को दिव्यांग के तौर पर पेश किया। इस पूरे मामले का खुलासा जौनपुर पुलिस ने गुरुवार को किया। पुलिस के खुलासे से हर कोई हैरान रह गया है।
जौनपुर पुलिस के दावों के अनुसार, सूरज भास्कर ने डीफार्मा कोर्स किया है। वह नीट की तैयारी कर रहा है। दिव्यांग कोटे से एमबीबीएस में दाखिला लेने के लिए उसने खुद ही अपने पैर का पंजा काट लिया। पुलिस की जांच में सामने आया है कि सूरज ने इंटरनेट पर पैर काटने का तरीका सर्च किया। इसके बाद ग्राइंडर से पंजा काट दिया। इसके बाद पैर का पंजा और ग्राइंडर मशीन को पास ही के कुएं में फेंक दिया।
पुलिस ने घटना में प्रयोग में लाए गए ग्राइंडर मशीन को बरामद कर लिया है। हालांकि, सूरज के बाएं पैर का पंजा नहीं मिल सका है। युवक की डायरी और प्रेमिका के बयान से पूरे सच का खुलासा हुआ।
सूरज ने पैर कटने के मामले में अज्ञात के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज कराया था। पुलिस का कहना है कि केस दर्ज कर जांच चल रही थी। अब इस मामले में पुलिस फाइनल रिपोर्ट यानी एफआर लगाने की तैयारी कर रही है। साथ ही, पुलिस धोखे में रखने को लेकर सूरज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है।
सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने कहा कि 18 जनवरी को सूचना मिली थी कि सूरज के साथ रात 12 बजे मारपीट की गई थी। वह सुबह सोकर उठा तो उसके बाएं पैर का पंजा कटा मिला था। केवल एंड़ी ही बची थी। पुलिस ने सूरज के बयान और तहरीर के आधार पर दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इस क्रम में सूरज की प्रेमिका से भी पूछताछ की गई। गर्लफ्रेंड ने पुलिस को बताया कि सूरज 2026में किसी भी हाल में एमबीबीएस में एडमिशन लेना चाहता है। अक्टूबर 2025 में वह बीएचयू गया। वहां दिव्यांगता के जरूरी दस्तावेज बनवाने की कोशिश की। वहां उसे सफलता नहीं मिली। बीएचयू से लौटने के बाद उसने खुद ही दिव्यांग बनने का फैसला लिया। अपने पैर का पंजा काट लिया। इसके बाद केस दर्ज कराकर मामले को अलग रुख दे दिया।
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