१० से १८ जनवरी तक प्रयागराज में होने वाले चिंतन दिवस में भाग लेने हेतु भारी संख्या में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता प्रयागराज पहुंच रहे हैं बताते हैं कि यहां किसानों की समस्याओं और सरकार द्वारा किये गये वादे किसानों के अनुसार पूरे न होने पर चर्चा होगी और मांगे मनवाने के लिए लिये जाएंगे निर्णय जिसमें भविष्य में रेल रोकों आंदोलन और धरने आंदोलन व प्रदर्शन भी हो सकते हैं।
धरती पुत्र अन्नदाता को जो सुविधाएं चाहिए और जो वादे किये गये थे वह तो पूरे होने ही चाहिए क्योंकि भरी सर्दी जब हम रिजाई से नहीं निकलना चाहते इनमें से ज्यादातर खेत में मौजूद होते हैं भरी बरसात में काम करते है तथा लू और गर्मी की चिंता किए बिना इनके द्वारा जो मेहनत कर हमें अन्न व अन्य खादय सामग्री पेट भरने हेतु उपलब्ध कराई जाती है वह महत्वपूर्ण है। कुछ लोगों का कहना होता है कि मेहनत करते हैं तो अनाज का पैसा भी लेते हैं यह भी कोई गलत नहीं है मगर अगर ये अनाज ही ना उगाये तो हम पैसे लेकर कहां घूमेंगे। एक-एक रोटी के लिए भी परेशान हो सकते हैं कहने का मतलब यह है कि किसान हो व्यापारी कर्मचारी हो या आम जनता सबको लोकतंत्र में अपनी बात कहने और उसे मनवाने का पूर्ण अधिकार है। मगर इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि लोकतंत्र में संविधान में सभी के अधिकार सुरक्षित किए गए हैं ऐसे में जो रेलों पर जो कब्जा होता है उस दौरान भी जाने-आने के लिए उससे टिकट आरक्षित कराकर नागरिक जब अपने गंतव्य तक पहुंचने हेतु स्टेशनों पर आते है और यहां रैली हो या धरना-प्रदर्शन कर कोई भी रहा हो मगर रेलों में कब्जा हो जाने और जब भीड़ होती है तो कहीं न कहीं एक दो लोग कुछ ऐसा भी करते हैं जो नहीं होना चाहिए और पिछले तीन-चार दशक में जो देखा ऐसे समय में पुलिस और अन्य जिम्मेदार आम आदमी के साथ चाहे कितनी भी सख्ती दिखा ले लेकिन ऐसे अवसरों पर मूकदर्शक ही बने रहते हैं। जिससे सामान्य नागरिक की परेशानियां मानसिक तनाव सामाजिक रूप से बेइज्जती और आर्थिक नुकसान जो होता है वह किसी से छुपा नहीं है। ऐसे में आवश्यक है कि सरकार या तो व्यवस्था बनाना सुनिष्चित करे अथवा रैली आदि में जाने वालों के लिए सभी स्टेशनों पर अलग से कुंभ मेले की भांति रेल चलाई जाए उनमें जाने वाले टिकट लेंगे या नहीं यह देखना तो जिम्मेदार अधिकारी या सरकार का काम है मगर टिकट आरक्षण कराकर गाड़ी में चलने वाले नागरिकों का ध्यान हर हाल में रखा जाना जरूरी है क्योंकि जब वह पैसा दे रहा है उन्हें उसे सुविधाएं भी मिलनी ही चाहिएं। यह उसका अधिकार भी है और सरकार की जिम्मेदारी भी। जिसे पूरा करने से शासन और सरकार सहित कोई भी इंकार नहीं कर सकते।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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