नई दिल्ली, 16 मई (ता)। दुनिया तेजी से अस्थिर और खतरनाक भू-राजनीतिक दौर में प्रवेश कर रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध, सैन्य टकराव और खुफिया गतिविधियों के बीच भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल जी.डी. बक्शी ने गंभीर चेतावनी दी है कि दुनिया में भू-राजनीतिक संकट तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में चल रहे वैश्विक युद्ध (जैसे रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व संघर्ष) का कोई अंत नजर नहीं आता। यह एक ऐसी ‘महाभारत’ है जिसके लिए भारत को हर हाल में तैयार रहना होगा। बक्शी ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मौजूदा हालात किसी “नई महाभारत” से कम नहीं हैं।
मेजर जनरल जीडी बक्शी ने लकी बीस्ट के पॉडकास्ट में एक बहुत ही गंभीर सच देश के सामने रखा है
इस युद्ध का कोई अंत नहीं है और हमें हर हाल में युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।
पूर्व मेजर जनरल ने यह टिप्पणी पूर्व खुफिया अधिकारी और चर्चित पॉडकास्टर लकी बिस्ट (स्नबाल ठपेीज) के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान की। जनरल बक्शी ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में एक साथ संघर्ष भड़क रहे हैं। रशिया-यूक्रेन युद्ध अभी भी जारी है, जबकि मध्य पूर्व में इजराइल-हमास संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन युद्धों का तत्काल कोई अंत नजर नहीं आता और आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन और अधिक अस्थिर हो सकता है। उनके अनुसार, दुनिया आज केवल पारंपरिक युद्ध नहीं बल्कि साइबर युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध, खुफिया ऑपरेशन और सूचना युद्ध जैसे नए संघर्षों के दौर से गुजर रही है। पॉडकास्ट में जनरल बक्शी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां केवल सीमाओं तक सीमित संघर्ष नहीं हैं, बल्कि यह वैश्विक व्यवस्था को बदलने वाली लड़ाई बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी महाभारत है जिसके लिए हमें हर हाल में तैयार रहना होगा। दुनिया में संकट तेजी से बढ़ रहा है और यह युद्ध जल्दी रुकने वाला नहीं दिखता।” जनरल बक्शी ने जोर देकर कहा कि भारत को सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर पूरी तरह तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में सबसे बड़ी ताकत राष्ट्रीय एकता होती है। इसलिए देशवासियों को डरने के बजाय एकजुट होकर खड़े रहना चाहिए। उन्होंने संदेश दिया, “घबराने की जरूरत नहीं है। इस मुश्किल घड़ी में पूरे देश को एक अभेद्य दीवार की तरह खड़ा होना होगा। जब पूरा देश एक साथ खड़ा होता है, तब कोई दुश्मन उसे नहीं हरा सकता।”
गाजा में इजराइल और हमास के बीच संघर्ष अभी भी जारी है। इजराइल लगातार हवाई हमले कर रहा है और हमास के शीर्ष कमांडरों को निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में इजराइल ने प््र्र ंस-क्पद ंस-भ्ंककंक को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया। गाजा का मानवीय संकट और गहरा हो चुका है। हजारों लोग विस्थापित हैं, अस्पतालों और राहत शिविरों पर भारी दबाव है। उधर, ईरान और इजराइल के बीच सीधा टकराव पहले से कहीं अधिक खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। ईरान समर्थित समूह हिजबुल्ला, इराकी मिलिशिया और यमन के हूती लगातार सक्रिय हैं। इजराइल सीरिया और लेबनान में ईरानी ठिकानों पर हमले कर रहा है। अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपने युद्धपोत और एयर डिफेंस सिस्टम बढ़ा दिए हैं। विशेषज्ञों को डर है कि यदि कोई बड़ा हमला हुआ तो पूरा मिडल ईस्ट क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। इसके अलावा यमन के हूती विद्रोही लाल सागर में जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने जवाबी सैन्य अभियान तेज कर दिए हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तीसरे वर्ष में पहुंच चुका है और फिलहाल किसी बड़े समाधान के संकेत नहीं दिख रहे। रूस धीरे-धीरे पूर्वी यूक्रेन में दबाव बढ़ा रहा है। ड्रोन और मिसाइल हमले लगातार जारी हैं। रूस ने अपनी रक्षा इंडस्ट्री को युद्ध मोड में डाल दिया है। वहीं यूक्रेन पश्चिमी हथियारों और आर्थिक सहायता पर काफी निर्भर है। ऊर्जा ढांचे और शहरों पर रूसी हमलों से भारी नुकसान हुआ है। सैनिकों और हथियारों की कमी यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। नाटो देश यूक्रेन को हथियार, ट्रेनिंग और खुफिया सहायता दे रहे हैं। हालांकि नाटो सीधे युद्ध में शामिल नहीं हुआ, लेकिन रूस लगातार आरोप लगाता है कि पश्चिम “प्रॉक्सी वॉर” लड़ रहा है।
दुनिया एक साथ यूरोप, मिडल ईस्ट और इंडो-पैसिफिक तनाव देख रही है। रूस बार-बार परमाणु हथियारों की चेतावनी दे चुका है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। अब केवल टैंक और मिसाइल नहीं, बल्कि साइबर अटैक, ड्रोन युद्ध, एआई आधारित निगरानी और सूचना युद्ध भी बड़े हथियार बन चुके हैं। भारत दोनों संकटों पर संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। भारत रूस से ऊर्जा और रक्षा सहयोग बनाए हुए है। साथ ही अमेरिका, इजराइल और खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक रिश्ते भी मजबूत कर रहा है। तेल कीमतों और वैश्विक व्यापार पर असर भारत की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व संकट और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां दुनिया को नए शक्ति संघर्ष की ओर ले जा रही हैं। भारत भी इन वैश्विक घटनाक्रमों के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। ऐसे में सुरक्षा, खुफिया तंत्र और राष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करना पहले से अधिक जरूरी माना जा रहा है।
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