आए दिन भिखारियों को इस काम से हटाने के लिए अभियान चलाने की खबरें मिलती है जो अच्छी खबरें है। बाजारों बस व रेलवे स्टेशनों पर भिखारियों की संख्या बढती जा रही है जिससे यात्रियों को परेशानी होती है। लेकिन अभियान से पहले जो नए भिखारी अरबपति लखपति पैदा हो रहे हैं उनकी सोच में बदलाव के प्रयास होने चाहिए। पिछले दिनों पढ़ा कि उद्योगपतियों ने करोड़ों रुपये बैंकों के मार लिए और उन्हें छूट देने के प्रयास होने लगे। व्यापार या उद्योग के लिए आए दिन सरकार से जमीन, टैक्स में राहत और बिना ब्याज के पैसों की मांग करने लगे हैं।जरुरतमंदों की मदद करना बुरा नहीं है। नए उद्योग लगाने वालों को प्रोत्साहन देना चाहिए लेकिन दशकों से उद्योग चला रहे उद्योगपति मुख्यमंत्री ये रियायतों की मांग करते हैँ तो अजीब लगताहै। यह सुविधाएं भी प्राप्त कर लेते हैँ जिससे आम आदमी में कुंठा पैदा होती है जिससे अमीर गरीब में खाई पैदा होती है। साधन संपनों द्वारा सरकार से सुविधा मांगना बंद होना चाहिए क्योंकि यह ऐसी व्यवस्था कही जा सकती है जिसे सरकार समाप्त करने की कोशिश कर रही है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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