Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • मुख्यमंत्री जी अभी हजारो हेक्टेयर भूमि और कब्जा मुक्त हो सकती है अफसर शिकायतों का कर रहे हैं फर्जी निस्तारण ढूंढने से भी खेती व कृषि की जमीन
    • बाईपास पर एक नामी कंपनी के स्टोर की चर्चा, रेडिसन ब्लू संगरीला द ललिता अशोका जैसे होटलों और नामचीन कंपनियों के सेल्स
    • कच्ची कॉलोनियां काटकर और अवैध निर्माण करने तथा सरकारी जमीन घेरकर बेचने वालों के खिलाफ देशभर में चलेगा बुल्डोजर सुविधा शुल्क लेने वाले भी बचा नहीं पाएंगे
    • पत्रकारों के साथ जो जनप्रतिनिधि करते थे अब युवाओं के साथ कर रहे हैं
    • छोटा हसनपुर से सिसौली तक भाजपा ने निकाली तिरंगा यात्रा
    • प्रो. उषा सिंह मेजर पद पर हुईं पदोन्नत
    • दीपके का ऐलान, जंतर-मंतर पार्ट 2 जल्द
    • रक्षाबंधन पर परिवहन निगम छह दिन अतिरिक्त बसों का संचालन करेगा
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूजीसी के नए नियमों पर लगी रोक ने विभाजन की संभावनाओं पर लगाया विराम! राजनीतिक दल जातिगत आधार पर ऐसा कोई काम ना करे जिससेे भाईचारा सदभाव प्रभावित होता हो, जाति देखकर कॉपी जांचने वाले शिक्षकों को समय से पूर्व दी जाए सेवानिवृति
    देश

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूजीसी के नए नियमों पर लगी रोक ने विभाजन की संभावनाओं पर लगाया विराम! राजनीतिक दल जातिगत आधार पर ऐसा कोई काम ना करे जिससेे भाईचारा सदभाव प्रभावित होता हो, जाति देखकर कॉपी जांचने वाले शिक्षकों को समय से पूर्व दी जाए सेवानिवृति

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJanuary 30, 2026No Comments7 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    कई बार राजनीति बाजों व कुछ मौको पर अपने स्वार्थ के लिए बाहुबलियों द्वारा जातिवाद को बढ़ावा देने की अनकही कोशिश एक खबर और १८८२ में शुरु हुए हंटर आयोग से चली और कम होने की बजाय रोक लगाने के दावों के बावजूद यह बढ़ती ही चली गई जातिगत मनमुटाव। इस बारे में न्यायालय की यह टिप्पणी सही कही जा सकती है कि आजादी के ७५ साल बाद भी हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके। मृत्युजंय तिवारी विनीत जैन और राहुल दीवान द्वारा १९५६ को लेकर संविधान के साथ साथ यूजीसी एक्ट का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई थी जिसकी सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाला बागची की बेंच ने फैसला दिया और यूजीसी के नियमों को पलट दिया। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी थी कि नियमों का संरक्षण उसी जाति आधारित भेदभाव को एससी एसटी और ओबीसी वर्ग का समर्थन करता है जो अनुच्छेद १४ में दिए गए समानता के अधिकार के खिलाफ है। बीती २९ जनवरी को यूजीसी के नियम को विभाजनकारी और इसके दुरुपयोग की आशंका को ध्यान में रखते हुए इस पर रोक लगाई और कहा कि सुनवाई पूरी होने तक २०१२ की नियमावाली ही प्रभावी रहेगी। जानकारी अनुसार पीठ ने पूछा कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को रैगिंग से बचाने के लिए प्रभावी तंत्र क्यों नहीं कार्रवाई कर रहे। अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह से पूछा गया कि एससी में ऐसे लोग भी है जो आर्थिक रूप से समृद्ध हो गए हैं। जातिमुक्त समाज के लिए जो कु छ किया क्या हम उससे पीछे जा रहे हैं। सीजेआई ने अलग अलग जातियो के लिए अगल हॉस्टल के रेगुलेशन पर भी सवाल उठाया उन्होंने कहा कि भगवान के लिए ऐसा मत करो अंतरजातीय विवाह भी होते हैं। यूजीसी के नियमों पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए।
    शीर्ष कोर्ट के इस संदर्भ में आए फैसले के बाद देशभर में खुशियां मनाई जा रही है। अदालत के फैसले को अपनी जीत इसके विरोधी बता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सीजेआई ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाकर देश को अलगाव से बचा लिया। इसे लेकर जो युवाओं द्वारा विरोध किया जा रहा था और फैसला नहीं आता तो यह विरोध मंडल आयोग के खिलाफ जो व्यवस्था शुरु हुई थी वैसा रूप भी ले सकने से इनकार नहीं कर सकते। मेरा मानना है कि यह फैसला सभी दलों के लिए सोचने और भविष्य में चुनावी रणनीति को राजनीति पर आधारित ना बनाने मार्ग प्रशस्त किया है।
    यूजीसी पर आए फैसले पर वो लोग स्वागत कर रहे हैं जिन्हें लगता था कि यह भाईचारा और सदभावना को प्रोत्साहित कर सकता है। मेरा मानना है कि सरकार बरेली के निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री पर जो कार्रवाई आरोप पत्र दाखिल किए जाने की बात चल रही है फिलहाल इस मामले की शांति के लिए उसे रोका जाए। इसके साथ ही इस आंदोलन से जोड़े गए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद आदि को नोटिस देने की बात चल रही थी उसे भी रोका जाए क्योंकि धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुददा है अगर ज्यादा चला तो फिर धार्मिक रूप भी ले सकता है।
    लेकिन इस सबके बावजूद भी यह देखा जाना बहुत जरुरी है कि कॉपी जांचने वाले शिक्षकों और विशेषज्ञों को यह जिम्मेदारी देते समय जातियों को लेकर उनकी मानसिकता और सोच को ध्यान में रखा जाए और ऐसे शिक्षकों को तैनाती दी जाए जो किसी भावना से ग्रस्त ना हो क्योंकि पूर्व में खबरें छपी थी कि सफरदरजंग मेडिकल अस्पताल में अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों को जाति देखकर जांच प्रभावित की र्गई थी ऐसी खबर उस समय देश के बड़े समाचार पत्र में प्रकाशित की गई थी कि २५ छात्रों को जाति देखकर फेल कर दिया गया था। मेरा मानना है कि ऐसे शिक्षकों को समय से पूर्व सेवानिवृति दी जाए और कोई ऐसी जिम्मेदारी का कार्य ना दिया जाए जो किसी छात्र की प्रगृति में रुकावट बनते हों।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    websitemarketing2019@gmail.com
    • Website

    Related Posts

    मुख्यमंत्री जी अभी हजारो हेक्टेयर भूमि और कब्जा मुक्त हो सकती है अफसर शिकायतों का कर रहे हैं फर्जी निस्तारण ढूंढने से भी खेती व कृषि की जमीन

    August 13, 2026

    कच्ची कॉलोनियां काटकर और अवैध निर्माण करने तथा सरकारी जमीन घेरकर बेचने वालों के खिलाफ देशभर में चलेगा बुल्डोजर सुविधा शुल्क लेने वाले भी बचा नहीं पाएंगे

    August 13, 2026

    पत्रकारों के साथ जो जनप्रतिनिधि करते थे अब युवाओं के साथ कर रहे हैं

    August 13, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.