हरिद्वार, 05 फरवरी। हरिद्वार में प्रेस क्लव, हरिद्वार द्वारा आयोजित हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताव्दी समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने गत दिवस वतौर मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक योगदान पर अपने विचार साझा किए। राज्यपाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का 200 वर्ष तक निरंतर सक्रिय रहना उसकी गहराई, प्रतिवद्धता और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने श्उदन्त मार्तण्डश् के प्रकाशन से आरंभ हुई हिंदी पत्रकारिता की यात्रा को राष्ट्र चेतना के जागरण का माध्यम वताया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की भावनाओं, संस्कृति और आत्मा की अभिव्यक्ति है। राज्यपाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता सत्य, विवेक और मूल्यों के साथ सत्ता से प्रश्न पूछती है और जनहित को केंद्र में रखती है, यही लोकतंत्र की वास्तविक चेतना है । उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल सत्ता परिवर्तन नहीं थी, बल्कि सभ्यता के पुनर्जागरण और नवभारत के निर्माण का संकल्प थी। इस संकल्प को आगे बढ़ाने में हिंदी पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यपाल ने कहा कि आज डिजिटल युग में मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, लेकिन पत्रकारिता का मूल धर्म अपरिवर्तित रहना चाहिए । उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता केवल घटनाओं की रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के वंचित वर्गों की आवाज, नारी सम्मान की संवाहक और सामाजिक सुधार की अग्रदूत रही है । हरिद्वार की आध्यात्मिक भूमि का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह नगर केवल तीर्थ नहीं, वल्कि भारत की चेतना का केंद्र है। वर्ष 2025 में हरिद्वार में आए करोड़ों पर्यटकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपनी लेखनी के माध्यम से करोड़ों लोगों तक सकारात्मक, राष्ट्रनिर्माण का संदेश पहुँचाएं । उन्होंने मीडिया से यह भी अनुरोध किया कि वह शहर की सफाई व्यवस्था हेतु जन जागरण का बीड़ा उठाए । राज्यपाल ने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे जनहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र पुनर्निर्माण के प्रति अपने दायित्व को संकल्प के रूप में स्वीकार करें और भारत को 2047 तक विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व गुरु बनाने की दिशा में अपनी भूमिका निभाएं।
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