बीती रात धार्मिक रीति रिवाजों से देशभर में होलिका जलाई तो सभी जगह लोग जमा हुए। आज ग्रहण की वजह से होली नहीं खेली गई। रंगों का त्योहार कल मनाया जाएगा। जितना नजर आ रहा है अब हिंदूओं के ज्यादातर त्योहार अब अलग अलग तारीख में मनाने का संदेश दिया जाने लगा है। भक्त भी विद्वानों की घोषणा के अनुसार होली मनाते हैं। बताते हैं कि रंगों के बाद कई दिन तक देवताओं की होली होती है जिसमें देवताओं के साथ भक्त होली खेलते हैं। होली दीवाली ऐसे त्योहार है जो सनातन धर्म को मानने वालों द्वारा मनाए जाते हैं। सहारनपुर जिले के बरसी गांव में एक अनोखी परंपरा महाभारत काल से चली आ रही है। गांव में रंग गुलाल खूब खेले जाते हेैं लेकिन होली नहीं जलाई जाती। यहां के पंचमुखी शिवमंदिर बेहद खास है क्योंकि इसमें स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। कहा जाता है कि पांच हजार साल पहले इस मंदिर का निर्माण कौरवों ने कराया था मगर महाभारत युद्ध के समय भीम ने मंदिर में अपनी गदा फंसाकर पूर्व से पश्चिम की तरफ घुमा दिया जिससे यह देश का एकमात्र पश्चिम मुखी मंदिर बन गया। मान्यता है कि इस गांव में होलिका दहन किया जाएगा तो उसकी आग से भगवान शिव के पैर झुलस सकते हैं इसलिए यहां होली का दहन नहीं होता। ५०० रुपये किलो से २ हजार रुपये किलो तक बिकने वाली गुजिया की एक किस्म इस बार सवा लाख कीमत की बाजार में बताई जाती है। चर्चा है कि इसकी मांग काफी है क्योंकि इस पर सोने का वर्क चढ़ाया गया है। त्योहार हंसी खुशी मने। ५०० और २ हजार किलो की गुजिया वालों दोनों को मुबारक। यह तो रहे होली के अनेक रंग।
मेरा मानना है कि बुराईयों पर अच्छाई की प्रतीक होली जिसकी आग में भक्त प्रहलाद तो सही सलामत बाहर आए लेकिन उनकी बुआ जलकर राख हो गई। केंद्र व प्रदेश की सरकारें सिद्धांतवादी और धर्म के मार्ग पर चलने वाली है। इसलिए जैसा खाए अन्न वैसा हो जाए मन यह भी नहीं कह सकते। सरकार की सोच और अन्न दोनों अच्छा है। फिर भी जैसा देखने में आ रहा है कोई ना कोई बु़राई देखने सुनने पढ़ने को मिल जाती है। जिसे रोकना समाज का काम है। इसे ध्यान में रख हम रंग गुलाल उड़ाए मगर रिश्तों की जो गरमाहट खत्म हो रही है पत्नी पति एक दूसरे को मार रहे है। आज एक खबर पढ़ी कि बहराइच के रुपईडीहा के रामनगर गांव में संपत्ति के विवाद में माता पिता और दादी की हत्या कर दी गई। ऐसी घटनाएं आए दिन देखने को मिल रही है। आओ हम सब मिलकर ऐसी घटनाएं ना हो समाज में ऐसी सोच को समावेश कर रिश्तों की गरमाहट स्थापित करने का प्रयास करें। होली में रंग गुलाल लगाएं और इसके साथ ही हम समाज में बढ़ रहे भ्रष्टचार, धोखेबाजी, दूसरे के लिए बुरा सोचने की प्रवूति को तिलांजलि देकर यह संकल्प ले कि भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था में लोगों को सांस लेने का अवसर मिले और सरकारी योजनाएं पात्रों तक पहुंचे तो इन बुराईयों को होली की लपटों में कुछ लोगों ने जलाई और बाकी रंगों के साथ धोकर अपने से दूर करे। अपने हितों की सुरक्षा और अन्यों की मदद हेतु सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज जिम्मेदारों तक पहुंचाएं तो कहा जा सकता है कि अगले साल तक देश में बुराईयों से मुक्त माहौल में मनाएंगे हम होली। होली के पांच दिन तक देवताओं की होली होती है मुझे लगता है कि भगवान ने हमें बुराईयां त्यागने और सबके सहयोग की सोच बनाने का समय उपलब्ध कराया है। चार तारीख को हुरियारों में शामिल होकर मस्ती से होली मनाओ। औरों को परेशानी ना हो इसका ध्यान रखो।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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