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    Home»देश»प्रदूषण अमीर फैलाते हैं खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ता हैं, इस नाम पर भय फैलाना बंद हो इससे छुटकारा कैसे मिले, इसके हो उपाय, इवेंट बनाने की कोशिश को रोका जाए
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    प्रदूषण अमीर फैलाते हैं खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ता हैं, इस नाम पर भय फैलाना बंद हो इससे छुटकारा कैसे मिले, इसके हो उपाय, इवेंट बनाने की कोशिश को रोका जाए

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comDecember 16, 2025No Comments7 Views
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    गरीबों को दोषी ठहराते हुए हर प्रकार के प्रदूषण को बढ़ाचढ़ाकर पेश करने तथा आम आदमी में अनकहे रूप से भय उत्पन्न करने की जो प्रथा शुरू हुई है वो बढ़ती ही जा रही है। प्रदूषण वाकई में है चाहे वह ध्वनि से हो या गंदगी से। आजकल देखने में आ रहा है कि इससे होने वाले नुकसानों का प्रचार करने में तो लोग आगे हैं लेकिन इसमें सुधार कैसे हो और गरीबों व किसानों की बजाय असली दोषियों पर क्या कार्रवाई हो यह सुझाव कोई नहीं देता। यूपी के मेरठ में होने वाली एक खेल प्रतियोगिता प्रदूषण के चलते स्थगित कर दी गई। तो एक समाचार देखने को मिला कि प्रदूषण से दिल्ली वालों की उम्र दो साल तक घटी। सवाल यह उठता है कि यह कैसे तय हो कि जीवन के दो साल इससे कैसे घट गए। यह ज्यादा भी हो सकते हैं और कम भी। किसी रिपोर्ट के आधार पर ऐसी सनसनी को सही नहीं कह सकते। एक्सक्लूसिव के नाम पर कुछ छापना है तो इसके दोषी कौन है और उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही उसे लेकर मीडिया में अगर चर्चाएं चले तो कुछ लाभ होने की उम्मीद की जा सकती है। वर्तमान में पराली जलाने के नाम पर किसानों के खिलाफ तो कार्रवाई हो रही है लेकिन शहरों में जो जिम्मेदार लोग और विभाग की नाक के नीचे कुूड़ाकर जलाकर प्रदूषण फैलाया जा रहा है उनकी तरफ कोई देखने को तैयार नहीं है और ना उन पर जुर्माने किए जा रहे हैं। जिन स्थानों पर प्रदूषण चरम पर होता है वहां की तो सफाई भ्ीा नहीं होती और ना कूड़ा उठाने की कोशिश की जाती है लेकिन प्रदूषण के नाम पर वीआईपी क्षेत्रों में छिड़काव किया जाता है वहां नाममात्र का भी प्रदूषण नहीं होता। इस संदर्भ में मैं गत दिवस सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अमीर प्रदूषण फैलाते हैं दिल्ली की जहरीली हवा पर सीजेआई की टिप्पणी। अगली सुनवाई १७ को होगी।
    एक खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ते वायु प्रदूषण से संबंधित मामलों में वह प्रभावी आदेश पारित करेगा, जिन्हें लागू किया जा सकेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि वह दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण संकट के मामले की सुनवाई 17 दिसंबर को करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह, जो एमिकस क्यूरी के रूप में बेंच की सहायता कर रही हैं। बेंच के समक्ष यह मामला उठाते हुए कहा कि हालांकि निवारक उपाय लागू हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा उनका खराब कार्यान्वयन ही मुख्य समस्या है। उन्होंने कहा कि जब तक यह अदालत कोई निर्देश नहीं देती, अधिकारी पहले से मौजूद प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते। इस पर पीठ ने कहा, यह मामला गत बुधवार को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष आएगा। इस पर सुनवाई अवश्य होगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम समस्या को जानते हैं और हम ऐसे आदेश पारित करेंगे जिनका पालन किया जा सके। कुछ निर्देश ऐसे हैं जिन्हें बलपूर्वक लागू किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि प्रदूषण की मार सबसे ज्यादा गरीबों पर पड़ती है, जबकि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों में अक्सर संपन्न वर्ग की भूमिका होती है। एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि गरीब मजदूर इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। महानगरों में लोगों की अपनी लाइफस्टाइल होती है और वो गंभीर वायु प्रदूषण के बावजूद उसमें बदलाव नहीं लाना चाहते। लेकिन गरीबों का क्या होगा।
    एक अन्य वकील ने बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित एक आवेदन का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व आदेशों के बावजूद स्कूलों में बाहरी खेल गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। राज्य अदालत के आदेश तक कोई कार्रवाई नहीं करेंगे… पिछले महीने आदेश पारित किया गया था कि दिसंबर-जनवरी में खेल आयोजन नहीं होंगे, इसके बावजूद ऐसे आयोजनों के लिए आदेश पारित किए जाने के बाद भी, उन्होंने आदेश को दरकिनार करने के तरीके खोज लिए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दिया हम समस्या को जानते हैं और आइए हम ऐसे आदेश पारित करें जिनका पालन किया जा सके। कुछ निर्देश ऐसे हैं जिन्हें सख्ती से लागू किया जा सकता है। इन शहरी महानगरों में लोगों की अपनी जीवनशैली होती है।
    सिंह ने कहा कि गरीब मजदूर सबसे ज्यादा पीड़ित हैं, और उन्होंने आगे कहा कि ग्रैप-४ उपायों के लागू होने से निर्माण मजदूर अब बेरोजगार हो गए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम केवल प्रभावी आदेश ही पारित करेंगे, कुछ निश्चित निर्देश हैं जिन्हें लागू किया जा सकता है, लोगों को उन परिस्थितियों के अनुरूप ढलना होगा। उन्हें अपनी जीवनशैली में बदलाव करना होगा… महानगरों में लोगों की अपनी जीवनशैली होती है जिसे वे नहीं बदलते, समस्या धनी वर्ग के साथ उत्पन्न होती है, गरीब वर्ग प्रभावित होता है।
    पहली बार देश के किसी जिम्मेदार पद पर बैठे माननीय द्वारा जो टिप्पणी की गई वो शत प्रतिशत सही है और जब तक दिए गए सुझावों पर पालन नहीं होता और दोषी संबंधित विभाग और उनके अफसरों को दोषी नहीं ठहराया जाएगा तब तक गरीब इसकी मार झेलता रहेगा और अमीर सुविधाओं के चलते इससे बचने की कोशिश करता रहेगा। इसे रोकने के प्रयास नहीं।
    मेरा मानना है कि प्रदूषण खतरनाक है उसे समाप्त होना चाहिए लेकिन जिस प्रकार से इसका प्रचार प्रसार हो रहा है उससे हर व्यक्ति चाहे गरीब हो या अमीर वो भय का शिकार बनता जा रहा है। इसलिए इस तरफ भी सरकार को ध्यान देना चाहिए कि किसी खबरों को छापते हुए इसे इवेंट बनाने की कोशिश कोई ना कर पाए।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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