पुलिस अधिकारियों के हवाले से छपी एक खबर के अनुसार तिरुवनंतपुरम के सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर से सोने की चोरी के आरोप में मुख्य पुजारी कंदाररु राजीवरु को गिरफ्तार किया गया है। समाचार के अनुसार बीते गुरूवार को पुलिस हिरासत में लिए गए राजीव बरु मंदिर के गर्भगृह (श्रीकोविल) के कपाट की चौखट पर लगे सोने की चोरी के मामले में तिरुवनंतपुरम के विशेष कारागार में बंद बताए जाते हैं। सोना हो या कोई और कीमती चीज वो भगवान के पुजारियों को उससे प्रभावित नहीं होना चाहिए क्योंकि सबरीमाला मंदिर से इस मामले में मुख्य पुजारी की सोना चोरी के लिए गिरफ्तारी से जहां सभी पुजारियों की साख प्रभावित होती है वही इन्हें भगवान का दूत मानकर चलने वाले भक्तों की भावनाएं भी आहत होती है इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। इससे मिलते जुलते अन्य प्रकरणों को लेकर पिछले कुछ वर्षो से खबरें पढ़ने सुनने को मिलने लगी है। पुजारियों के प्रति विश्वास बना रहे इसके लिए ऐसे मौके ही समाप्त किए जाए जिसके चलते मन में लालच की भावना पनपकर चोरी तक पहुंच जाए। क्योंकि मंदिरों में उपलब्ध सोना चांदी हीरे पैसा सब भक्तों द्वारा समर्पित किया जाता है इसलिए वो संपत्ति तो भगवान की हो गई लेकिन उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मुझे लगता है कि केंद्र व प्रदेश सरकारों को अलग अलग क्षेत्रों के ११-११ सदस्यों की निगरानी समिति बनाई जाए और जब भी धन रखे लॉकर खोले जाए तो इनमें से छह सदस्य अनिवार्य रूप से मौजूद हो तभी यह खुल पाएं। इसकी चाभी बैंक लॉकर के समान व्यवस्थित हो तो भक्तों की श्रद्धा और पुजारियों की आस्था बनी रहेगी। जो वक्त की सबसे बड़ी जरुरत कह सकते है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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