पंजाब के गुरुदासपुर की पुलिस चौकियों पर हमला करने वाले तीन आतंकियों को पीलीभीत में ढूंढ निकालने वाले और पंजाब पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में तीनों आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराने में सफल रहे अविनाश पांडे पूर्व में २०१९-२० में मेरठ के एसपी देहात रह चुके हैं। पीलीभीत में एसपी रहे २०२४ में उक्त प्रशंसनीय कार्य कर चुके २०१५ बैच के आईपीएस अधिकारी अविनाश पांडे जनपद को अच्छी प्रकार से जानते हैं और अपने व्यवहार व कार्य प्रणाली के चलते वो उस समय भी यहां काफी लोकप्रिय रहे थे। इसलिए यह तो विश्वास से कहा जा सकता है कि सर्वगुण संपन्न आईपीएस अफसर अविनाश पांडे यहां एक सफल कप्तान के रूप में अपराध और अपराधियों पर रोक लगाने व नागरिकों की अपने कार्यालय से लेकर थानों तक सम्मान दिलाने में सफल रहेंगे। २०१५ में आईपीएस बनने से पहले अविनाश पांडे इनकम टैक्स इंस्पेक्टर और डाक विभाग में लिपिक के पद पर रहकर कार्य कर चुके हैं। जिन पदों पर वह रहे उसे देखते हुए यह कह सकते हैं कि वो आज अगर एसएसपी के पद पर तैनात हैं तो पूर्व में दो पदों पर रहते हुए जनसमस्याओं और पुलिस से आम आदमी के समक्ष उत्पन्न होने वाली परेशानी को समझते हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा गत देर रात ११ जिलों के कप्तान और २४ जिलों के आईपीएस के किए गए तबादलों में अविनाश पांडे को मेरठ जैसे संवेदनशील जनपद का एसएसपी बनाया गया है। नागरिकों को उनसे कई प्रकार की उम्मीदे हैं। वो पूरी करने के साथ ही अविनाश पांडे को पिछले एक माह से जाम की समस्याओं से जूझ रहे शहरवासियों को राहत दिलाने में सक्षम रहेंगे लेकिन उन्हें इस मामले में काफी प्रयास करने पड़ेंगे क्येांकि शहर की ज्यादातर सड़कें व हाईवे भी लंबे जाम की समस्या से जूझ रहा है। मैं यह तो नहीं कहता कि जो व्यवस्था वर्तमान में है वो गलत है लेकिन जो परिणाम सामने हैं उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि पिछले एक माह में यातायात की समस्या काफी बढ़ गई है और नागरिक जाम से फंसने से चलते घर से निकलने में डरने लगे हैं क्योंकि सिपाही चौराहों पर खडे होकर जो यातायात व्यवस्था संभाल रहे है वह कब किस तरफ का मार्ग खोलेंगे यह नहीं कहा जा सकता। जाम के चलते छोटे रास्तों पर भी जाम की समस्या बढ़ गई है क्योंकि जाम से बचने के लिए लोग छोटे रास्तों का सहारा ले रहे हैं।
कप्तान साहब यह समस्या एक जगह की नहीं है। पूरे देश की है लेकिन अपने यहां मेडा आवास विकास और नगर निगम की लापरवाही से मानचित्र के विपरीत सड़क से चार मीटर जगह छोड़कर निर्माण ना करने से जाम की समस्या उत्पन्न हुई है। दूसरे शहर का कोई भी बाजार हो व्यापारी जितनी दुकान की जगह नहीं है उससे ज्यादा अपना सामान सड़क तक लगा लेते हैं और उनके आगे गा्रहकों के वाहन खड़े हो जाते है। इसके अलावा रोक के बावजूद सदर बाजार सहित सभी बाजारों में ई रिक्शा बेखौफ घूमते हैं। टोकने पर मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। थाना पुलिस की खामोशी के कारण यह भी एक जाम की बड़ी समस्या है।
कप्तान साहब खासकर थानेदारों को आपके स्तर से बनने वाली नीतियों को लागू करने के लिए भी तैयार करना होगा क्योंकि दोपहिया वाहनों का चालान करने से कुछ होने वाला नहीं है। जो जुगाड़ वाहन लोहे के पाइस और मानक से ज्यादा सामान भरकर छोटा हाथी बाजारों में घूमते हैं प्रतिबंध के बावजूद। इन समस्याओं पर नए एसएसपी अविनाश पांडे को ध्यान देना होगा और यातायात नियंत्रण के लिए बनाई व्यवस्था में स्कूल बंद होने के समय पूर्व डीजीपी ब्रजलाल और ८० के दशक में कप्तान रहे रावत और वीकेवी नायर द्वारा जो बिना किसी तामझाम के सादी वर्दी में घूमकर जानकारी की जाती थी ऐसा कोई निर्णय नए एसएसपी को लेना होगा। जिन पदों पर रहकर वह कार्य कर चुके हैं उसके चलते उन्हें कोई परेशानी भी नहीं होगी क्येांकि वह आम आदमी की परेशानी को समझते हैं। कानून का शासन और भयमुक्त वातावरण बनाने में आम आदमी का सहयोग तो उन्हें पूरी तौर पर मिलेगा। पूर्व डीजीपी चतुर्वेदी कहा करते थे कि अगर हमारे अफसर जनता की नब्ज टटोलने और अव्यवस्था कहां से शुरु हो रही है उसका पता कर समाधान की कोशिश करे तो पुलिस नागरिक भाई भाई का नारा साकार हो सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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