नई दिल्ली, 15 मई (ता)। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। कई देशों में महंगाई बेकाबू हो चुकी है। पेट्रोल-डीजल, गैस, सोना, दूध और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। फरवरी से जारी इस संकट ने अब भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। बीते कुछ दिनों में केंद्र सरकार की तरफ से लिए गए कई बड़े फैसले इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में भारत में भी महंगाई चरम पर पहुंच सकती है। सबसे ज्यादा चिंता पेट्रोल-डीजल और एलपीजी गैस को लेकर जताई जा रही है। लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में ईंधन और गैस के दामों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है?
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से 7 अहम अपीलें की थीं। इनमें पेट्रोल-डीजल की बचत, खाद्य तेलों का कम इस्तेमाल और संसाधनों को बचाने जैसी बातें शामिल थीं। इन अपीलों के तुरंत बाद सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने महंगाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार पहले से ही आने वाली आर्थिक चुनौतियों को लेकर सतर्क हो चुकी है।
बीते रोज ही सरकार ने सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी। इसका असर तुरंत बाजार में दिखाई दिया और सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल आ गया। 24 कैरेट सोना 1.61 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया, जबकि चांदी के दाम भी लगातार रिकॉर्ड बना रहे हैं। पीएम मोदी पहले ही लोगों से अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील कर चुके हैं। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। यहीं नहीं सोने के बाद अब सीएनजी के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। मुंबई और आसपास के इलाकों में सीएनजी 2 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है। इससे पहले भी पिछले महीने कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी.. इसका सीधा असर ऑटो, टैक्सी और सीएनजी गाड़ियों से सफर करने वाले लोगों पर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होने का असर धीरे-धीरे बाकी चीजों की कीमतों पर भी दिखाई देता है।
वहीं दूसरी ओर चंद ही दिनों में देशभर में दूध के दाम भी बढ़ चुके हैं। बड़ी डेयरी कंपनियों ने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी कर दी है। कंपनियों का कहना है कि पशुओं के चारे, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च लगातार बढ़ रहा है। जिस वजह से दाम बढ़ाए गए है, इसी महीने कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में भी करीब हजार रुपये तक की बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसका असर होटल, ढाबों और खाने-पीने के कारोबार पर पड़ रहा है और आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ता जा रहा है। हालांकि महंगाई पर कंट्रोल करने के लिए सरकार कुछ कदम भी उठ रही है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। सरकार को आशंका है कि इस बार चीनी उत्पादन कम रह सकता है, इसलिए घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने से रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है। रॉ और सफेद दोनों तरह की चीनी के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई गई है। इसकी वजह उत्पादन में कमी है। हलांकि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर खेती पर भी दिखाई दे रहा है। खाद की कमी और बढ़ती लागत के कारण किसान पहले से परेशान हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार लगातार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कर रही है।अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो खेती से जुड़े खर्च और बढ़ सकते हैं, जिसका असर सीधे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा..इन हालातों को देखते हुए अब सबसे बड़ी चिंता यही है कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। रिजर्व बैंक पहले ही संकेत दे चुका है कि अगर युद्ध जारी रहता है तो महंगाई और बढ़ सकती है। सरकार भी तेल बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि सरकार का कहना है कि देश में फिलहाल 60 दिनों का कच्चा तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में है। इसके बावजूद तेल विपणन कंपनियां प्रतिदिन करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा उठा रही हैं। ऐसे में अगर हालात लंबे समय तक खराब रहे तो पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं महंगाई को लेकर एक और बड़ी जानकारी सामने आई है। पश्चिम एशिया संकट के कारण अप्रैल में थोक महंगाई दर बढ़कर 8.3 प्रतिशत पहुंच गई, जो साढ़े तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर है।
अप्रैल में पेट्रोल की थोक कीमतों में 32.40 प्रतिशत, डीजल में 25.19 प्रतिशत और एलपीजी में 10.92 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कच्चा तेल 88 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। इसके अलावा तिलहन, खनिज, कपड़े, रसायन और खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। दूध, अंडा, मांस और मछली तक महंगे हो चुके हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो हालात यही संकेत दे रहे हैं कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में भारत में महंगाई और बढ़ सकती है। सरकार लगातार लोगों से संसाधनों की बचत करने की अपील कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत इस वैश्विक संकट के असर को सीमित रख पाएगा या फिर आम आदमी को आने वाले दिनों में और महंगाई झेलनी पड़ेगी।
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