नई दिल्ली, 09 मई (ता)। डिफेंस सेक्टर में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत ने ऐसा स्वदेश अत्याधुनिक ग्लाइडेड वेपन सिस्टम तैयार किया है, जो किसी भी सामान्य हथियार को सटीक वार करने वाले घातक हथियार में तबदील कर देगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना ने पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (टारा) का सफल परीक्षण किया है। रक्षा मंत्रालय ने गत दिवस कहा कि यह परीक्षण ओडिशा तट के पास किया गया । टारा, एक मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट है, जो भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली है, जो बिना मार्गदर्शन वाले वारहेड को सटीक निर्देशित हथियार में परिवर्तित करती है।
टारा को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत तथा डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है, ताकि कम लागत वाले हथियार की मारक क्षमता और सटीकता बढ़ाकर भूमि आधारित लक्ष्यों को निष्क्रिय किया जा सके। अनुसंधान केंद्र (आरसीआई) ने अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर डिजाइन और विकसित किया है, ताकि जमीनी लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए कम लागत वाले हथियार की मारक क्षमता और सटीकता को बढ़ाया जा सके। यह मॉर्डन और कम लागत वाले सिस्टम का इस्तेमाल करने वाला पहला ग्लाइड हथियार है। इस किट को डीसीपीपी और अन्य भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।
पहले सफल उड़ान परीक्षण के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, डीसीपीपी और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया। डीआरडीओ के सचिव और अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी सफल उड़ान परीक्षण में शामिल टीमों को बधाई दी।
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