प्रयागराज 12 जनवरी। प्रदेश के कोषागारों में पेंशन और एरियर भुगतान से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले की परतें अब और खुलेंगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश की ट्रेजरी से बकाया पेंशन, ग्रेच्युटी व अन्य लाभों का अनधिकृत खातों में भुगतान घपले की जांच कराने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने यह आदेश एक जिले में 57पेंशनरों के खाते में 42,04,22,093रूपये अनधिकृत रूप से जमा करने के खुलासे के बाद दिया है। हालांकि की धोखाधड़ी की आरोपी 85वर्षीय महिला जोगवा उर्फ जगुवा को सशर्त अंतरिम जमानत देते हुए अर्जी पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।और अगली सुनवाई की तिथि 28जनवरी नीयत की है।
कोर्ट ने कहा हो सकता है प्रदेश के अन्य जिलों की ट्रेजरी के जरिए अनधिकृत भुगतान किया जा रहा हो।मृत पेंशनर के वारिस फर्जी जीवन प्रमाणपत्र के जरिए पेंशन उठा रहे होंगे,इसकी जांच की जाय।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने 28,06,506रूपये की पेंशन खाते से धोखाधड़ी की आरोपी वृद्ध महिला की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि अपीलार्थी की उम्र 84 साल है और वह महिला है। न्यायमूर्ति का कहना था कि 57 पेंशनर्स के खातों में 42 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी हुई है और यह संभव है कि अन्य जिलों में भी ऐसे मामले हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की जांच की जानी चाहिए और दोषियों को सजा दिलाई जानी चाहिए।
याची का कहना था एक अमित मिश्रा उसके पास आया बोला गलती से उसका पैसा याची के खाते में आ गया है।उसकी बेटी की शादी है।जिसपर याची ने अपने खाते में आये पैसे निकाल कर अमित मिश्रा को दे दिया। उसने कोई धोखाधड़ी नहीं की है।
वह 29 अक्टूबर 25से जेल में बंद हैं। रिहा होने पर हर सहयोग के लिए तैयार है। सरकार की तरफ से जमानत का विरोध किया गया।कहा गया कि याची की जानकारी मे था तभी उसने पैसे निकाल कर दिए। वह भी धोखाधड़ी मामले में लिप्त है। कोर्ट ने याची की उम्र व महिला होने के नाते अंतरिम जमानत दी है।

