इंटरनेशनल फोरम फोर एनवायरनमेंट के एक अध्ययन में सामने आया है कि देश में ८० प्रतिशत प्रदूषण की वजह धूल और धुआ है। धूल खत्म करने के लिए अस्थायी उपाय किए जाते हैं वहीं धुआ रोकने के नाम पर सिर्फ पराली जलाने से रोकने का काम किया जाता है। इस रिपोर्ट में आया कि एनसीआर में प्रदूषण की मुख्य वजह कोयला और गोबर लकड़ी भी है। दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए जमीनी कदम नहीं उठाने वालों पर कार्रवाई की बात संबंधित मंत्रालय कर रहे हैं। हवा की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर प्रभावी नाम सामने आ रहे हैं। मैं किसी संगठन की रिपोर्ट को नहीं नकार रहा लेकिन यह कहना चाहता हूं कि ऐसी संस्थाओं को जमीनी ज्ञान की आवश्यकता है। क्योकि सर्वे में कहा गया कि ८० प्रतिशत प्रदूषण धूल की वजह से है जिसे खत्म करने के उपाय भी होते हैं। मेरा मानना है कि यह जो उपाय हो रहे हैं जहां इनकी जरूरत है वहां ना होकर वीआईपी क्षेत्रों में पानी का छिड़काव करके ऐसे दावे किए जा रहे हैं वरना दिल्ली के कुछ इलाकों को छोड़कर एनसीआर क्षेत्र में सड़क किनारे उड़ती धूल नाले नालियों की गंदगी जैसी बातें इस प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन अफसरों के खिलाफ कुछ सख्त कार्रवाई ना होने के चलते इसमें बढोत्तरी होती जा रही है जबकि सरकार बजट बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री की सिलेंडर योजना से लकड़ी के धुंए में कमी आई है और गोबर उपयोगी सिद्ध हो चुका और इसके उपले उपयोगी होते हैं इनसे प्रदूषण होने की बात तो इसे करने वाले ही जानें। मेरा केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस प्रकार के सर्वे करने वालों के लिए भी नियम बनाए जाएं क्योंकि अपनी मर्जी से समाज में गलतफहमी और सरकार को बदनाम करने का प्रयास शुरू कर देते हैं। कुछ साल पहले देश में गरीबी और आम आदमी को रोटी नहीं मिल रहेी जैसी फिल्म दिखाकर पुरस्कार ले लिया। कहने का आश्य है कि प्रदूषण के सही कारण ढूंढे जाएं और किसी भी विषय पर रिपोर्ट जारी करने वालों पर नियम बने। उसे पूरा करने के बाद ही रिपोर्ट जारी की जाए।
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति का अधिकार है इसलिए रोक तो नहीं लगाई जा सकती लेकिन ऐसी रिपोर्ट जारी होने से भय व्याप्त होता है जो सही नहीं है। इसे ध्यान रखते हुए नियम बनाना वक्त की मांग कही जा सकती है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- माननीय मुख्यमंत्री जी दें ध्यान! जैना ज्वैलर्स के अवैध निर्माणकर्ताओं पर अधिकारी मेहरबान क्यों? दो मानचित्र पास की आड़ में बने भवन को बचाने का प्रयास अफसर क्यों कर रहे है
- मतदाता सर्वेक्षण जैसे कार्य के लिए अलग से बने विभाग और नियुक्त हो कर्मचारी, निर्वाचन आयुक्त स्पष्ट करे जिन लोगों के वोट कट गए या नहीं बने और वो सही हैं उनका क्या होगा
- विश्लेषण: गुस्सा बढ़ा देता है शरीर का पुराना दर्द
- दिल्ली से देहरादून तक 670 रुपये हो सकता टोल
- बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी, बीमा कानून संशोधन विधेयक पर कैबिनेट ने लगाई मुहर
- यूपी: 67 आईएएस अधिकारियों को पदोन्नति, चार आईएएस अफसर प्रमुख सचिव और 19 सचिव बने
- गाजीपुर में भाजपा नेता का कत्ल! प्रधान के बेटे की पीट-पीटकर निर्मम हत्या; सड़क किनारे मिला शव
- छूते ही उखड़ गई 14 करोड़ की सड़क, हंगामे के बाद नोटिस
