मिलावटी खाद्य सामग्री और विदेशी व्यंजनों या बढ़ते प्रदूषण के चलते बीमारियों का प्रकोप बढ़ना और नई बीमारी पैदा होना आम बात हो गई है। अनियमित खानपान और काम में कोताही ने अब गुर्दे और दिल टीबी व कैंसर की बीमारी से पीड़ितों की संख्या बढा दी है। जितने उपाय इनके इलाज के होने चाहिए वो सरकार द्वारा उपलब्ध कराने के बाद भी होते नजर नहीं आ रहे हैं। जिस कारण अन्य बीमारियों के तो इलाज कराने में लोग करा रहे हैं लेकिन गुर्दे व किडनी की बीमारी ऐसी समस्या है जिससे छ़ुटकारे का पूर्ण इंतजाम अभी नहीं हो पा रहा है। इसलिए किडनी का काला कारोबार में लगे लोगों की संपत्ति बढ़ती ही जा रही है। पहले सुनते थे कि झोलाछाप डॉक्टर पैसों के लालच में ऐसे काम में सहयोग करते हैं लेकिन अब कानपुर में पकड़े गए किडनी रैकेट जिससे मेरठ सहित अन्य जिलों के डॉक्टर भी संबंध बताए जा रहे हैं इसमें कानपुर की आईएमए उपाध्यक्ष प्रीती आहूजा डॉ सुजीत सिंह आहूजा शिवम अग्रवाल राजेश कुमार नरेंद्र सिंह और रामप्रकाश आदि सहित ११ लोगों को गिरफ्त में लिया गया है जिसमें से तीन अस्पताल संचालक बताए जाते हैं। खबरों के अनुसार आठवीं पास शिवम अग्रवाल गले में स्कोप डालता था। उसके द्वारा बिचौलिये के रुप में जरुरतमंदों को फंसाकर छह से दस लाख में उनकी किडनी ली जाती थी और ६० लाख से एक करोड़ तक में बेची जाती थी। किडनी निकालने के बाद मरीज को किसी छोटी बीमारी का पीड़ित बताकर आहूजा हॉस्पिटल प्रिया हास्पिटल एवं ट्रामा सेंटर मैडलाइफ हॉस्पिटल में भेजा जाता था जहां कई लोग गिरफ्त में आए। इस मामले में मेरठ के दो डॉक्टरों का नाम संबंध बताया जा रहा है लेकिन इससे पूर्व बुलंदशहर के एक परिवार ने बागपत रोड स्थित एक हॉस्पिटल संचालक पर अपनी किडनी निकालने का आरोप लगाया था। इसके अलावा ऐसे मामले पकड़ में आते रहते हैं लेकिन पुख्ता कार्रवाई दोषियों के खिलाफ ना होने से यह धंधा खबरों के अनुसार खूब फल फुूल रहा है। यह स्थिति तब है जब सरकार ने अंग लेने देने के लिए नियमावली बनाई है जिसके तहत डीएम और सीएमओ सहित कई डॉक्टरों की समिति बनाई गई है लेकिन डोनर कम और पीड़ित ज्यादा होने से लोग चालबाजों के झांसे में फंस जाते हैं। मुजफ्फरनगर की एक महिला का ट्रांसप्लांट एक करोड़ में किया गया और किडनी बेगूसराय निवासी एक छात्र की ली गई। महिला की हालत खराब बताई जा रही है। ऐसा तो नहीं कह सकते कि ऐसे कारोबार एकदम बंद हो जाएंगे लेकिन सरकार को इस बारे में सरल नियम बनाने चाहिए जिससे पीड़ित व्यक्ति मीडिया के माध्यम से लोगों से आग्रह कर सके कि वो उनकी मदद के रुप में किडनी या अन्य अंगदान करें इससे लेनदेन करने वालों में आर्थिक समझौते हो लेकिन यह जो बिचौलिये करोड़ों रुपये खा रहे हैं उनका पत्ता साफ और यह अवैध धंधा बंद हो जाएगा। सरकार ऐसे प्रकरणों की सख्ती से जांच कराकर कार्रवाई करे और आम जनता को भी इससे अवगत कराए जिससे वह चौकस रहे और कोई दलालों के चक्रव्यूह में ना फंसे।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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