आजादी के बाद आई गतिशीलता से जहां हर क्षेत्र में जागरूकता आई और तरक्की की नए मार्ग खुले वहीं वक्त के साथ दौड़ने की जो रफ्तार बढ़नी शुरू हुई तो वो रूकने का नाम नहीं ले रही है। वैसे भी कहते हैं कि हमेशा कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए। एक फिल्मी गाना भी है चलना ही जिंदगी है रूकना है मौत मेरी। वर्तमान में तो गतिशीलता चरम पर है। समाज के साथ चलने और आगे बढ़ने के दौर में कोई भी नागरिक समय खराब नहीं करना चाहता। ऐेसे में सर्दियों के लगभग तीन माह में पड़ने वाला कोहरे को लेकर सभी में एक चिंतन की लहर चल रही है क्योंकि स्कूलों में छुटटी होने से बच्चे और अभिभावक दोनों ही परेशान रहते है क्योंकि बच्चों की पढ़ाई छुटती है तो घरवालों की बच्चों की फरमाइश से समय का पता ही नही चलता। व्यापार उद्योग ध्ंाधे सब प्रभावित हो रहे हैं। बड़ी कंपनियों में मोटी तनख्वाह पाने वाले समय से दफ्तर नहीं पहुंच पा रहे हैं क्योंकि साईकिल सवार से लेकर हवाई यात्रा तक कोहरे से प्रभावित हैं। ट्रेनें कई घंटे लेट चल रही है और फ्लाइट रद हो रही है। सड़क मार्ग भी प्रभावित है। ऐसे में कोहरे की समस्या का समाधान खोजा जाना वक्त की सबसे बड़ी मांग सबके हित में कही जा सकती है।
स्मरण रहे कि जब जब देश में नई सरकारें आती है तो संबंधित मंत्रालयों के अफसर मंत्री व जनप्रतिनिधि बताते रहे हैं कि कोहरे की चादर से थमने वाली गति को हर मिनट सक्रिय रखने और गतिमान बनाने के लिए इस बारे में उपाय खोजे जा रहे हैं। कई मौकों पर तो जनप्रतिनिधियों द्वारा गर्मी के दिनों में स्पष्ट कहा जाता रहा है कि इस बार कोहरा रफ्तार नहीं थाम पाएगा। लेकिन सर्दी आने पर सारे दावे हवाई और तैयारियां ढाक के तीन पात से ज्यादा नजर नहीं आते। जहां तक पता चलता है सर्द हवाओं और कोहरे के दौरान उद्योग व्यापार के मामले में अरबो रूपये का व्यापार प्रभावित होता है तो स्कूल संचालकों को तो कोई परेशानी नहीं होती क्यांकि उन्हें पूरी फीस मिलती है और आराम भी लेकिन इससे जो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है वो उसका भविष्य प्रभावित करने में सक्षम कही जा सकती है।
कोहरे के नाम पर स्कूलों में ना हो छुटटी, १२ से चार का हो समय
मेरा मानना है कि खासकर स्कूलों में कोहरे और ठंड और गर्मी के नाम पर कोई छुटटी ना की जाए। स्कूल का समय दिन में १२ बजे से ४ बजे तक का किया जा सकता है। इससे बच्चे भी पढ़ सकेंगे। कोहरे की यातायात की बात है तो मेरा मानना है कि देश हर क्षेत्र में निरंतर प्रगृति की ओर अग्रसर है। लगभग डेढ़ दशक में केंद्र सरकार ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कई ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है और देश के वैज्ञानिक बड़ी कठिनाईयों का समााधान खोजने में सफल हैं। ऐसे में हर प्रकार के यातायात को सुचारू बनाने के लिए सरकार को वैज्ञानिकों से सलाह कर उन्हें आर्थिक सहायता देकर कोहरे को चीरने और आगे बढ़ने में मददगार ऐसी लाइटों का निर्माण कराना चाहिए जिससे कोहरे व ठंड में लोग जा सके। इसे ध्यान में रखकर सरकार के साथ साथ युवा वैज्ञानिकों को इस कोहरे के प्रकोप से छुटकारे का स्थायी समाधान खोजने के लिए हर संभव प्रयास करने होंगे। तभी भविष्य में प्रगृति और दुनियाभर में उपलब्यिां प्राप्प्त करने के लिए सबके कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सकते हैं वरना अब कोहरा काफी कष्टदायक होने लगा है। जिसका समाधान होना ही चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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