Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • 23 हजार शिक्षक-प्रधानाचार्याे की भर्ती की प्रक्रिया तेज
    • फैसला सरकार को ही लेना है, फिर दिखावा कैसा: सुप्रीम कोर्ट
    • अवैध रूप से हो रहा आरा मशीन का संचालन
    • अब अलग किरदार निभाने का समय है : लिंडसे लोहान
    • यूपी में 84 वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों का तबादला, कई जिलों के एडीएम वित्त और सिटी मजिस्ट्रेट बदले
    • सब कुछ कार्यपालिका नियंत्रित कर रही है : सुप्रीम कोर्ट
    • हस्तिनापुर से विस चुनाव लड़ने की तैयारी में चंद्रशेखर
    • गैंगस्टर उधम सिंह की तलाश में तीन राज्यों में पांच टीमों की दबिश; सीओ को टशन दिखाते हुए वीडियो वायरल
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»सब कुछ कार्यपालिका नियंत्रित कर रही है : सुप्रीम कोर्ट
    देश

    सब कुछ कार्यपालिका नियंत्रित कर रही है : सुप्रीम कोर्ट

    adminBy adminMay 15, 2026No Comments3 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली, 15 मई (ता)। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे। अदालत ने कहा कि यदि चयन समिति में केवल सरकार का प्रभाव रहेगा, तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
    जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब सीबीआई निदेशक की नियुक्ति समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाता है, तो चुनाव आयोग जैसे लोकतंत्र के अहम संस्थान की नियुक्ति प्रक्रिया में कोई स्वतंत्र सदस्य क्यों नहीं है।
    जस्टिस दत्ता ने कहा कि सीबीआई निदेशक के चयन में सीजेआई शामिल होते हैं। इसे कानून व्यवस्था और श्रूल ऑफ लॉश् बनाए रखने से जोड़ा जा सकता है। लेकिन लोकतंत्र को बनाए रखने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र सदस्य क्यों नहीं होना चाहिए?
    अदालत ने यह भी कहा कि मौजूदा व्यवस्था में चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। ऐसे में यदि प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के बीच मतभेद हो, तो तीसरा सदस्य सरकार के पक्ष में ही जाएगा।
    जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आज प्रधानमंत्री एक सदस्य चुनते हैं और विपक्ष का नेता दूसरा। यदि दोनों में असहमति हो, तो तीसरा सदस्य किसके साथ जाएगा? तब तो कार्यपालिका ही सब कुछ नियंत्रित कर रही है।
    इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वह इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगाना चाहते। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक रूप से हर बार ऐसा होगा, यह मैं नहीं कह सकता। हालांकि अदालत ने कहा कि मौजूदा ढांचे में फैसले प्रभावी रूप से 2ः1 के बहुमत से होंगे और केंद्रीय मंत्री का सरकार के रुख से अलग जाना मुश्किल दिखता है। पीठ ने यह भी कहा कि संसद को कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन कानून की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास है।
    जस्टिस दत्ता ने कहा कि पहली नजर में हमें यह परेशान करता है कि कार्यपालिका के पास वीटो जैसी स्थिति क्यों है? संसद कानून बना सकती है, लेकिन उसकी संवैधानिक वैधता की जांच और व्याख्या सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।

    Desh New Delhi Supreme Court tazza khabar tazza khabar in hindi The Executive is controlling everything: Supreme Court
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    23 हजार शिक्षक-प्रधानाचार्याे की भर्ती की प्रक्रिया तेज

    May 15, 2026

    फैसला सरकार को ही लेना है, फिर दिखावा कैसा: सुप्रीम कोर्ट

    May 15, 2026

    अवैध रूप से हो रहा आरा मशीन का संचालन

    May 15, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.