दुनिया में सबसे लोकप्रिय और प्रचलन में शामिल अमेरिकी डालर की शुरूआत 234 साल पहले 2 अप्रैल 1792 को हुई और इसे मिंट एक्ट जो अमेरिकी कांग्रेस ने पास किया था उसमें इसे आधिकारिक मुद्रा अमेरिका की बनाया गया।
इस संदर्भ में जानकारी अनुसार एक कानून से हुई डॉलर की शुरुआत
जानकारों के अनुसार, डॉलर शब्द स्पेनिश और जर्मन सिक्कों से प्रेरित होकर रखा गया था।
शुरुआती दौर में तांबे, चांदी और सोने के सिक्के जारी किए गए थे।
मूल रूप से एक डॉलर की कीमत चांदी के वजन के आधार पर तय की गई थी।
शुरुआत में केवल सिक्के ही थे, कागजी नोट बहुत बाद में 1860 के दशक में आए थे।
आज विश्व का लगभग 60 से 70 फीसदी व्यापार डॉलर में ही होता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल मुख्य रूप से डॉलर में ही खरीदा-बेचा जाता है।
जालसाजी रोकने के लिए समय-समय पर डिजाइन और सुरक्षा फीचर में बदलाव किए जाते हैं।
डॉलर का सुप्रसिद्ध चिन्ह ‘$’ मूल रूप से स्पेनिश ‘पेसो’ के संक्षिप्त रूप से विकसित हुआ है
1792 के अमेरिका में सिक्कों की ढलाई के लिए पहली सरकारी टकसाल फिलाडेल्फिया में बनाई
दुनिया की 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को ‘डॉलर इंडेक्स’ से मापा जाता है
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने आपातकालीन कोष में सबसे ज्यादा डॉलर ही जमा रखते हैं।
दुनिया के लगभग हर देश में अमेरिकी डॉलर को आसानी से स्वीकार या बदला जा सकता है।
आज से 234 साल पहले, 2 अप्रैल 1792 को अमेरिकी कांग्रेस ने ‘मिंट एक्ट’ पास किया था। इस कानून के तहत ही डॉलर को अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा बनाया गया था।
इतने सालों बाद अब भी अमेरिकी डालर के प्रचलन और पहचान में काफी बढ़ोत्तरी हो गई है। और अपने देश की करंसी के साथ साथ पुरी दुनिया में नागरिक अमेरिकी डालर की चाहना कम नहीं हो पाई है। जब इसको मान्यता मिली तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि यह मुद्रा जिसे अधिकारिक रूप से बनाया गया है सैंकड़ो साल बाद भी इस क्षेत्र में चर्म पर होगी।
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