लंदन/नई दिल्ली, 09 जून (ता)। जब सेल्फ-ड्राइविंग (बिना ड्राइवर वाली) कारें दुर्घटना करती हैं तो इंजीनियरों के लिए यह समझना पहेली बन जाता है कि एआई के दिमाग में आखिर चल क्या रहा था। किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने इसी पहेली को सुलझाने के लिए एक नया एल्गोरिदम बनाया है। दरअसल, सेल्फ-ड्राइविंग कारें चलते समय अपने कैमरों और सेंसरों की मदद से हर सेकंड लाखों डाटा पॉइंट (जैसे- सामने कौन है, मौसम कैसा है, सड़क पर क्या लिखा है) रिकॉर्ड करती हैं। दुर्घटना होने के बाद, यह नया एल्गोरिदम उस पूरे सफर को सिम्युलेटर (कंप्यूटर गेम की तरह) में दोबारा चलाता है। यहीं पर वैज्ञानिकों की ‘एक्चुअल कॉजैलिटी’ वाली तकनीक काम आती है। एल्गोरिदम हादसे के समय की परिस्थितियों में छोटे-छोटे बदलाव करके देखता है, जैसे- अगर वह पीली कार 2 मील पहले कट न मारती, तो क्या यह एआई भ्रमित होता। अगर सड़क पर लगा वह साइन बोर्ड थोड़ा साफ होता, तो क्या कार रुक जाती। यह नया एल्गोरिदम सभी संभावनाओं को छानता है और दोषी को ढूंढ निकालता है।
भविष्य में कैसे मददगार होगा यह प्रयोग
जानकारों अनुसार लंदन और सैन फ्रांसिस्को जैसी जगहों पर सेल्फ-ड्राइविंग कारें बढ़ रही हैं। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि गलती कहां हुई, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं रोकी जा सकें और लोगों का इस तकनीक पर भरोसा बढ़े। यह तकनीक सिर्फ कारों तक ही नहीं, बल्कि अस्पतालों के रोबोट और अन्य एआई सिस्टम में भी काम आ सकती है।
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