प्रयागराज, 07 फरवरी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में गिरफ्तार बिल्डर अभय कुमार को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अभय कुमार द्वारा दाखिल हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को मंजूर करते हुए उनकी गिरफ्तारी और रिमांड को नियमों के विरुद्ध माना है। यह फैसला जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश कहा कि संबंधित अथॉरिटी याचिकाकर्ता अभय कुमार को तुरंत रिहा करे. सरकारी वकील (एजीए) इस आदेश की जानकारी तत्काल अधिकारियों को दें और रिहाई के लिए सर्टिफाइड कॉपी का इंतज़ार न करें।
नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिल्डर अभय कुमार सिंह रिहा करने का आदेश दिया है। अभय कुमार को 20 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने आदेश में कहा कि अभय कुमार सिंह की गिरफ्तारी में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन में चूक हुई है।
कोर्ट ने बिल्डर अभय कुमार सिंह की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका को मंजूर कर लिया और तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया। इस आदेश के बाद गत देर रात अभय कुमार सिंह को जेल से रिहा कर दिया गया। बता दें कि 16 जनवरी की देर रात ऑफिस का काम खत्म कर युवराज मेहता अपनी ग्रैंड विटारा कार से घर लौट रहे थे। घर से महज 500 मीटर पहले ही मोड़ पर घने कोहरे की वजह से एक प्लॉट में भरे पानी में युवराज की कार डूब गई, जिसमें युवराज की मौत हो गई। युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता की तहरीर नॉलेज पार्क थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। बिल्डर की लापरवाही के कारण गैर इरादतन हत्या और बीएनएस की अन्य धाराओं के तहत ये मुकदमा दर्ज हुआ।
लोअर कोर्ट से नहीं मिली थी जमानत
इसके बाद नोएडा पुलिस ने बिल्डर अभय कुमार सिंह को 20 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया। निचली अदालत ने अभय कुमार सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और न्यायिक हिरासत बढ़ाई दी थी, लेकिन अब कहानी में एक नया ट्विस्ट आया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना कि बिल्डर की गिरफ्तारी के तरीके में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। पुलिस की तरफ से चूक हुई है।
युवराज मेहता की मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपी बिल्डर अभय कुमार की हैबियस कॉर्पस याचिका मंजूर कर ली और उसे रिहा करने का आदेश दिया। इससे पहले मामले में दो आरोपी, लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन के कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल को जमानत मिल चुकी है। गत दिवस नोएडा पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिल्डर की रिहाई के आदेश दिए।
बता दें कि हैबियस कॉर्पस याचिका का मतलब है बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी अवैध रूप से हिरासत में रखना। कोर्ट ऐसे मामलों में व्यक्ति को कोर्ट के सामने पेश करने या रिहा करने का आदेश देती है। इस मामले में भी यही हुआ है।
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