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    समय के साथ अपना अस्तित्व खो रहा काशी का प्राचीन सोमेश्वर महादेव मंदिर

    adminBy adminFebruary 28, 2026No Comments4 Views
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    वाराणसी, 28 फरवरी (जन)। दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक वाराणसी, जिसे बनारस या काशी भी कहा जाता है, हिंदुओं का प्रमुख तीर्थस्थल है। उप्र में गंगा के तट पर स्थित वाराणसी एक पवित्र और ऐतिहासिक शहर है, जिसे शिव नगरी भी कहा जाता है। बनारस अपने प्रसिद्ध ‘काशी विश्वनाथ मंदिर’ के साथ सुबह-शाम की भव्य और पारंपरिक तरीके से की जाने वाली गंगा आरती के लिए जाना जाता है। यह शहर ज्ञान, आध्यात्मिकता, संगीत, संस्कृति और कला के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है, जो अपने घाटों, साड़ियों और पान के लिए भी विश्वभर में जाना जाता है। बनारस सनातन संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र है, जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ‘काशी विश्वनाथ मंदिर’ के साथ हजारों मंदिर स्थित हैं। बनारस के बारे में कहा जाता है कि यहां की हर गली में एक मंदिर है, जिसके कारण इसे ‘मंदिरों का शहर’ भी कहा जाता है। वाराणसी के उन्हीं मंदिरों में से एक ‘सोमेश्वर महादेव मंदिर’ है, जो काशी के हृदय में स्थित एक अत्यंत पवित्र, ऐतिहासिक और प्राचीन शिव मंदिर है।
    काशी विश्वनाथ मंदिर की भव्यता और गंगा आरती की मनमोहक छटा पर्यटकों को बरबस आकर्षित करती है। सोमेश्वर महादेव मंदिर लगभग हजार वर्ष पुराना यह मंदिर कभी सनातन धर्म का प्रमुख केंद्र था, जहां भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए उमड़ते थे। लेकिन आज यह मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। छत गिरने का खतरा मंडरा रहा है, रास्ता खंडहरों जैसा खतरनाक हो चुका है। मंदिर में सफेद संगमरमर का शिवलिंग और उसके समक्ष नंदी की प्रतिमा विराजमान है। साथ ही हनुमान जी का दुर्लभ रूप राम-लक्ष्मण को कंधों पर लिये हुए है।
    स्कंद पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है, जो इसकी प्राचीनता को प्रमाणित करता है। काशी की इस धरोहर को बचाने के लिए तत्काल प्रयास आवश्यक हैं। यदि समय रहते संरक्षण न किया गया तो यह ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए खो जाएगी। स्थानीय प्रशासन और भक्तों को एकजुट होकर इसकी बहाली करनी होगी।

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