कांग्रेस सांसद शशि थरुर द्वारा देशभक्त वीर सावरकर जी के नाम पर दिया जाने वाला पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया। यह खबर पढ़कर औरों ने क्या महसूस किया वो अलग बात है लेकिन मुझे इससे बहुत ही अफसोस हुआ है। इस बारे में प्राप्त एक खबर के अनुसार कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वीर सावरकर अवॉर्ड लेने से इंकार कर दिया है। उन्होंने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि वह श्वीर सावरकर इंटरनेशनल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2025्य स्वीकार नहीं करेंगे। थरूर ने आयोजकों पर बिना अनुमति उनका नाम घोषित करने को श्गैर-जिम्मेदाराना्य करार दिया।
यह अवॉर्ड हाईरेंज रूरल डेवलपमेंट सोसायटी (एचआरडीएस) इंडिया द्वारा शुरू किया गया है और थरूर को इसके पहले पुरस्कार विजेताओं में शामिल किया गया था। थरूर ने एक्स पर लिखा कि उन्हें इस सम्मान के बारे में केवल मीडिया रिपोर्ट्स से जानकारी मिली।
शशि थरूर ने कहा, श्मुझे पता चला कि मुझे श्वीर सावरकर अवॉर्ड्य के लिए चुना गया है। कल ही स्थानीय निकाय चुनाव में वोट डालने के लिए मैं केरल में था, वहीं मीडिया के सवाल पर मैंने स्पष्ट किया कि मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है और न ही मैंने इसे स्वीकार किया है। आयोजकों का मेरी सहमति के बिना नाम घोषित करना गैर-जिम्मेदाराना है।्य
थरूर ने आगे कहा, श्अवार्ड की प्रकृति, आयोजन संस्था या किसी अन्य विवरण के बिना मेरे इस कार्यक्रम में शामिल होने या अवॉर्ड स्वीकार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।्य थरूर के बयान के बाद एचआरडीएस इंडिया के सचिव अजी कृष्णन ने दावा किया कि संगठन ने उन्हें पहले ही सूचित किया था।
न्यूज एजेंसी के अनुसार, शशि थरूर ने कहा कि एचआरडीएस इंडिया के प्रतिनिधि और जूरी चेयर थरूर के घर गए थे और वहीं आमंत्रण दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उस दौरान थरूर ने अन्य पुरस्कार विजेताओं की सूची मांगी थी। इस बीच, केरल के कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा कि अवॉर्ड स्वीकार करना या ठुकराना पूरी तरह थरूर का व्यक्तिगत निर्णय है।
पुरस्कार देने वाली हाईरेंज रूरल डेवलपमेंट सोसायटी (एचआरडीएस) इंडिया से सरकार को जवाब मांगना चाहिए कि उन्होंने शशि थरूर की बिना सहमति के यह पुरस्कार उन्हें देना क्यों घोषित किया। लेकिन मैं किसी का अपमान तो नहीं कर रहा हूं लेकिन शायद शशि थरुर इस पुरस्कार को प्राप्त करने में सक्षम नहीं है। वो एक प्रतिष्ठित राजनेता हैं और काफी समय से देश विदेश में चर्चित भी हैं। इसलिए उनके सम्मान में तो कुछ नहीं कह सकता लेकिन इस पुरस्कार को लेने से इनकार करना उनके लिए ठीक नहीं। और वो भी ऐसे समय में जब पुरस्कार देने वाली संस्था के सचिव अजी कृष्णन कह रहे हैं कि इस मामले की जानकारी काफी पहले कांग्रेस सांसद को दे दी गई थी।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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