नई दिल्ली 20 जुलाई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना हमेशा अश्लीलता के दायरे में नहीं आता है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि कोई शब्द तभी अश्लील माना जाएगा, जब वह कामुकता को बढ़ावा देने वाला हो या लोगों को भ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखता हो।
कोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु के एक मामले में सुनवाई के दौरान की। आरोपी मणि को जमीन विवाद के दौरान मां की गाली देने के लिए अश्लीलता के आरोप में दोषी ठहराया गया था। अगस्त 2017 में जमीन विवाद को लेकर आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज की थी। पीड़ित का आरोप था कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों भी कहे। बाद में घर से हथियार लाकर हमला कर दिया, जिससे उसकी नाक की हड्डी टूट गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अशीलता और आपराधिक धमकी के आरोपों से आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गाली देने से किसी को परेशानी हुई, यह साबित नहीं हुआ। हालांकि, शिकायतकर्ता को गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में उसकी सजा बरकरार रखी गई है। आरोपी की उम्र करीब 70 साल होने और स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने उसकी सजा को घटाकर कोर्ट उठने तक की कैद कर दिया है। साथ ही, उसे दो महीने के भीतर 50,000 रुपए का जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया है। बता दे कि 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक वकील ने हंगामा किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी भाषा या शब्द को अश्लील मानने के लिए उसके संदर्भ और प्रभाव को देखना जरूरी है। केवल अपमानजनक या गाली भरे शब्दों को अश्रीलता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की अश्रीलता से जुड़ी दोषसिद्धि को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के आरोपों को सही मानने के बाद भी इस्तेमाल किए गए। शब्द केवल गाली-गलौज और अपशब्दों की श्रेणी में आते हैं, न कि कानूनी अर्थों में अश्लीलता के दायरे में। आरोपी की उम्र करीब 70 साल होने, स्वास्थ्य स्थिति और घटना के पुराने होने को ध्यान में रखते हुए सजा में राहत दी। अदालत ने उसकी सजा को घटाकर श्अदालत उठने तक की कैदश् कर दिया और उसे दो महीने के भीतर 50 हजार रुपये का जुमानां जमा करने का निर्देश दिया। यह मामला अगस्त 2017 में तमिलनाडु में कृषि भूमि विवाद से जुड़ा था, जिसमें बहस के बाद आरोपी पर हमला करने और गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप लगे थे।
ये था मामला
अगस्त 2017 में जमीन विवाद को लेकर आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज की थी। पीड़ित का आरोप था कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों भी कहे। बाद में घर से हथियार लाकर हमला कर दिया, जिससे उसकी नाक की हड्डी टूट गई थी। निचली अदालत ने उसे अश्रीलता, गंभीर चोट और धमकी के लिए दोषी माना था। सुप्रीम कोर्ट ने अश्लीलता और आपराधिक धमकी (आईपीसी की धारा 506) के आरोपों से आरोपी को बरी कर दिया।

