Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • मुख्यमंत्री जी अभी हजारो हेक्टेयर भूमि और कब्जा मुक्त हो सकती है अफसर शिकायतों का कर रहे हैं फर्जी निस्तारण ढूंढने से भी खेती व कृषि की जमीन
    • बाईपास पर एक नामी कंपनी के स्टोर की चर्चा, रेडिसन ब्लू संगरीला द ललिता अशोका जैसे होटलों और नामचीन कंपनियों के सेल्स
    • कच्ची कॉलोनियां काटकर और अवैध निर्माण करने तथा सरकारी जमीन घेरकर बेचने वालों के खिलाफ देशभर में चलेगा बुल्डोजर सुविधा शुल्क लेने वाले भी बचा नहीं पाएंगे
    • पत्रकारों के साथ जो जनप्रतिनिधि करते थे अब युवाओं के साथ कर रहे हैं
    • छोटा हसनपुर से सिसौली तक भाजपा ने निकाली तिरंगा यात्रा
    • प्रो. उषा सिंह मेजर पद पर हुईं पदोन्नत
    • दीपके का ऐलान, जंतर-मंतर पार्ट 2 जल्द
    • रक्षाबंधन पर परिवहन निगम छह दिन अतिरिक्त बसों का संचालन करेगा
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»चुनाव»हाउसवाइफ नहीं, नेशन बिल्डर हैं महिलाएं… सुप्रीम कोर्ट ने कहा- उनके काम की कीमत कम से कम ₹30000 महीना
    चुनाव

    हाउसवाइफ नहीं, नेशन बिल्डर हैं महिलाएं… सुप्रीम कोर्ट ने कहा- उनके काम की कीमत कम से कम ₹30000 महीना

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJune 11, 2026No Comments6 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि अगर किसी सड़क दुर्घटना में घरेलू कामकाजी महिला की मौत हो जाती या वह काम करने में असक्षम हो जाती है, तो उसकी ओर से परिवार को दी जाने वाली घरेलू देखभाल के नुकसान को भी मुआवजे का एक अलग आधार माना जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणी की घरेलू सेवाओं के नुकसान का मूल्य कम से कम 30,000 प्रति माह तय किया है. कोर्ट ने साफ किया कि घरेलू देखभाल का नुकसान मोटर दुर्घटना मामलों में अब मिलने वाले अन्य मुआवजों से अतिरिक्त होगा.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा महिलाओं के बारे में बनी पारंपरिक धारणाओं को बदलने की जरूरत है. उनके लिए ‘हाउसवाइफ’ की जगह ‘होममेकर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. होममेकर वास्तव में राष्ट्र निर्माता हैं और उन्हें उसी रूप में पहचान और सम्मान मिलना चाहिए.

    कोर्ट के सामने मामला क्या था?
    जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन के सिंह की बेंच ने यह फैसला एक ऐसे मामले में दिया, जिसमें एक व्यक्ति ने एक्सीडेंट में अपनी पत्नी को खो दिया था. 25 नवंबर 2001 को सिरसा से फतेहाबाद जाते महिला की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. महिला के तीन बच्चे थे. महिला के परिवारवालों ने मुआवजे के लिए पहले मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, सिरसा का रुख किया. ट्रिब्यूनल ने महिला को सामान्य मजदूर मानते हुए 2 लाख का मुआवजा उसके उत्तराधिकारियो को देने का निर्देश दिया. परिवार इस राशि से संतुष्ट नहीं था और हाई कोर्ट पहुंचा. लगभग 20 साल बाद, दिसंबर 2024 में पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 8.43 लाख रुपये कर दिया. हालांकि, परिवारवालों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणी के घरेलू योगदान को ध्यान में रखते हुए कुल मुआवजा 62 लाख 77हजार 900 रुपये तय किया.

    घर की धुरी है महिलाएं
    सुप्रीम कोर्ट ने न केवल मुआवजे पर फैसला आने में हुई देरी पर चिंता जताई, बल्कि गृहिणियों के आर्थिक और सामाजिक योगदान को रेखांकित किया. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन के सिंह ने कहा कि किसी गृहिणी को परिवार के कमाने वाले सदस्यों पर निर्भर बताना उचित नहीं है. वास्तव में घर की पूरी व्यवस्था काफी हद तक गृहिणी के श्रम और देखभाल पर ही निर्भर करती है. कोर्ट ने कहा कि खाना बनाना, घर की साफ-सफाई करना, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करना जैसे घरेलू कार्य देश की अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से सहारा देते हैं. इन कार्यों के चलते परिवार के बाकी सदस्य अपनी नौकरी और व्यवसाय पर ध्यान दे पाते हैं. इसके बावजूद इन कार्यों को आर्थिक गतिविधि के रूप में पर्याप्त मान्यता नहीं मिलती.

    देश की अर्थव्यवस्था में गृहणियों का 15-17 प्रतिशत योगदान
    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में टाइम यूज सर्वे-2019 का हवाला देते हुए कहा कि 15-59 वर्ष की महिलाएं प्रतिदिन सात घंटे से अधिक समय घरेलू कामों में लगाती हैं, जबकि पुरुष इन कामों के लिए तीन घंटे से भी कम समय देते हैं. कोर्ट ने कहा कि महिलाओं की ओर किया जाने वाला यह अवैतनिक घरेलू देखभाल से जुड़ा काम भारत की अर्थव्यवस्था में 15 से 17 प्रतिशत तक योगदान देता है, लेकिन इसके बावजूद इन्हें न तो उचित आर्थिक मान्यता मिली है और न ही समाज में पर्याप्त सम्मान.

    housewife Supreme Court
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    websitemarketing2019@gmail.com
    • Website

    Related Posts

    पत्रकारों के साथ जो जनप्रतिनिधि करते थे अब युवाओं के साथ कर रहे हैं

    August 13, 2026

    छोटा हसनपुर से सिसौली तक भाजपा ने निकाली तिरंगा यात्रा

    August 13, 2026

    प्रो. उषा सिंह मेजर पद पर हुईं पदोन्नत

    August 13, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.