नई दिल्ली, 14 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में 2023 में हुई जातीय हिंसा के मामलों पर सुनवाई की। कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह जातीय हिंसा से जुटी 11 एफआईआर की जांच पर दो हफ्ते के अंदर स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के बजाय मणिपुर हाई कोर्ट या गुवाहाटी हाई कोर्ट को इन मामलों के ट्रायल और जांच की निगरानी करनी चाहिए। बेंच के अनुसार, मणिपुर हाई कोर्ट में अब नए चीफ जस्टिस आ चुके हैं, इसलिए वे स्थानीय हालात को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। कोर्ट ने केंद्र और मणिपुर सरकार को निर्देश दिया कि वे जस्टिस गीता मित्तल कमेटी की सिफारिशों को हर हाल में लागू करें। यह कमेटी पीड़ितों के पुनर्वास और उनके कल्याण के लिए बनाई गई थी। इस कमेटी में तीन पूर्व महिला जज शामिल हैं, जो अब तक पीड़ितों की मदद के लिए कई रिपोर्ट सौंप चुकी हैं।
शीर्ष अदालत ने केंद्र और मणिपुर सरकार से जातीय हिंसा पीड़ितों के पुनर्वास के संबंध में जस्टिस गीता मित्तल समिति की सिफारिशें लागू करने को भी कहा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त इस समिति में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गीता मित्तल के अलावा बांबे हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिनी पी जोशी और दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश आशा मेनन शामिल थीं। समिति ने अब तक पीड़ितों के पुनर्वास उपायों पर कई रिपोर्टें प्रस्तुत की हैं। मणिपुर में तीन मई, 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 200 से अधिक लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। यह हिंसा तब शुरू हुई जब पहाड़ी जिलों में बहुसंख्यक मैतेयी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में श्आदिवासी एकजुटता मार्चश् का आयोजन किया गया था।
सुनवाई के दौरान पीड़ित की तरफ से पेश हुईं वकील वृंदा ग्रोवर ने एक पीड़ित महिला का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि गैंगरेप की शिकार एक कुकी महिला की पिछले महीने सदमे और बीमारी से मौत हो गई। वकील ने आरोप लगाया कि सीबीआई ने चार्जशीट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और मुख्य आरोपी भी कोर्ट में पेश नहीं हो रहा है। उन्होंने जांच में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। इस पर सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मणिपुर में अब हालात पहले से बेहतर और शांतिपूर्ण हैं।
चीफ जस्टिस ने कहा कि पीड़ितों को मुफ्त कानूनी मदद मिलनी चाहिए। अगर स्थानीय स्तर पर वकील उपलब्ध नहीं हैं, तो गुवाहाटी बार से वकील भेजे जा सकते हैं। वहीं, वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने शिकायत की कि उन्हें कमेटी की रिपोर्ट नहीं मिल रही है, जिससे पुनर्वास का काम धीमा पड़ा है। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में कुछ संवेदनशील जानकारी हो सकती है, इसलिए उसे सावधानी से साझा किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 26 फरवरी को अगली सुनवाई करेगा। कोर्ट ने जस्टिस गीता मित्तल कमेटी का कार्यकाल भी 31 जुलाई तक बढ़ा दिया है ताकि राहत कार्य जारी रह सके।
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