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    Home»देश»पॉक्सो एक्ट के गलत इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
    देश

    पॉक्सो एक्ट के गलत इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

    adminBy adminJuly 14, 2026No Comments2 Views
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    नई दिल्ली, 14 जुलाई (ता)। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर किशोरों के आपसी सहमति से बने रिश्तों में पॉक्सो एक्ट के गलत इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस बीवी नागरथना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि जब टीनेज लड़कियां अपने पार्टनर्स के साथ परिवार वालों के बिना अनुमति के शादी करने लेतीं हैं, तो माता-पिता अक्सर अपनी तथाकथित ‘इज्जत’ बचाने के लिए आपराधिक मामले दर्ज करा देते हैं।
    उच्चतम न्यायालय ने गत दिवस सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि प्रेम संबंधों के कारण लड़का-लड़की के घर छोड़कर भागने की घटनाओं को आखिर कैसे रोका जा सकता है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाने वाले किशोरों के खिलाफ पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के कथित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई।
    न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने टिप्पणी की कि जब किशोर लड़कियां अपने साथियों के साथ चली जाती हैं, तो माता-पिता अक्सर अपनी तथाकथित सामाजिक प्रतिष्ठा या इज्जत बचाने के लिए आपराधिक मामले दर्ज कराते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो कानून का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यौन उत्पीड़न और शोषण से बचाना है। पीठ ने आगे कहा कि 15 से 18 वर्ष की आयु बेहद संवेदनशील होती है और यह जीवन में प्रयोग करने की उम्र है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये मामले वास्तव में पॉक्सो के दायरे में आते हैं।
    शीर्ष अदालत किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। यह कानूनी प्रक्रिया कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2023 के एक विवादास्पद फैसले के बाद शुरू हुई थी, जिसमें किशोर लड़कियों को अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई थी। इस फैसले को 2024 में उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था और किशोरों की निजता के अधिकार पर कई निर्देश जारी किए थे।
    मामले में अदालत की सहायता कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने बताया कि पॉक्सो मामलों में व्यवस्था की विफलता को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की गई है। उन्होंने पीठ को एक उदाहरण दिया जिसमें एक नाबालिग लड़की 25 वर्षीय पुरुष के साथ भाग गई थी, लेकिन अब वह उसके साथ खुश है और उनका एक बच्चा भी है। दीवान ने दलील दी कि कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक ठोस व्यवस्था की जरूरत है क्योंकि आपसी सहमति से रिश्तों में शामिल किशोरों को भी जेल भेज दिया जाता है।
    अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि किशोरों के बीच शारीरिक संबंध वर्ष 2012 में सहमति की कानूनी उम्र 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष किए जाने से पहले भी बन रहे थे। पीठ ने कहा कि सहमति की उम्र बढ़ने के बाद ऐसे मामले कानूनी रूप से अवैध हो गए हैं। न्यायालय ने जोर दिया कि इस दिशा में दिए जाने वाले निर्देश व्यावहारिक होने चाहिए ताकि किशोरों के कल्याण और बाल संरक्षण के उपायों को प्रभावी बनाया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

    Desh New Delhi Supreme Court Supreme Court expresses concern over misuse of POCSO Act. tazza khabar tazza khabar in hindi
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