मेरठ 29 जुलाई (प्र)। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अंकतालिका वितरण व्यवस्था सवालों के घेरे में है। छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री अंकित अधाना का आरोप है कि शाम के समय कंप्यूटर सेल से प्रिंट होकर गोपनीय विभाग की खिड़कियों पर पहुंचने वाली अंकतालिकाओं को बिचौलिए छात्रों से मोटी रकम लेकर तत्काल उपलब्ध करा देते हैं, जबकि छात्र सहायता केंद्र से आवेदन करने वाले विद्यार्थियों महीनों चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में लगातार शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने गोपनीय विभाग की खिड़कियों से सीधे आवेदन लेने पर रोक लगाने के निर्देश तो दे दिए लेकिन तय समयसीमा अंकतालिका उपलब्ध कराने और संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।
अंकित के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में बीएससी काउंटर सहित कई पटल पर महीनों पुराने आवेदन लंबित हैं। आरोप लगाया कि कई मामलों में विश्वविद्यालय छात्रों के घर खाली लिफाफे भेजकर परीक्षा विभाग से रिपोर्ट लगवाकर दोबारा जमा करने को कह रहा है। उनका कहना है कि जब छात्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा कर चुका है तो संबंधित पटलों से रिपोर्ट जुटाने की जिम्मेदारी कर्मचारियों की होनी चाहिए न कि छात्रों की।
छात्रों की मांग है कि छात्र सहायता केंद्र के जरिये आवेदन करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को 15 दिन में अंकतालिका उपलब्ध कराई जाए। निर्धारित समय में मार्कशीट जारी नहीं होने पर संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई की जाए। छात्रों के घर खाली लिफाफे भेजने की प्रक्रिया तत्काल बंद कर परिसर में दलालों की गतिविधियां रुकनी चाहिए। छात्रों ने कहा, समस्याओं का 15 दिन में समाधान नहीं हुआ तो विश्वविद्यालय परिसर में धरना- प्रदर्शन करेंगे।
उधर, विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव गोपनीय ने मंगलवार को आदेश जारी कर गोपनीय विभाग, व्यवसायिक पाठ्यक्रम विभाग व परिसर सेल के कर्मचारियों द्वारा अंकतालिकाओं के आवेदन सीधे प्राप्त करने की व्यवस्था बंद कर केवल आनलाइन व छात्र सहायता केंद्र से आफलाइन स्वीकार करने को कहा है। कोई आवेदन सीधा न प्राप्त करें। इस आदेश की अवहेलना करने पर संबंधित कर्मचारी उत्तरदायी होंगे।
प्रोफेसर संजय भारद्वाज ही देखेंगे वेरिफिकेशन व रिजल्ट सेल
सीसीएसयू की ओर से 14 जुलाई को कार्य परिषद बैठक में लिए गए निर्णय के तहत प्रोफेसर संजय भारद्वाज को ही अगले छह महीने के लिए वेरिफिकेशन व रिजल्ट सेल का कार्यभार दिया गया है। वह लंबे समय से इन कार्यों को देखते भी आ रहे हैं।

