खाद्य सामग्री में मिलावट कहें या विभिन्न कीटनाशक दवाओं और केमिकल आदि उपयोग किये जाने वाले माध्यमों के प्रयोग से जो खाद्य सामग्री फल सब्जी इस्तेमाल कर रहे है या चारों ओर फैली गंदगी प्रदूषण और हवा जो भी हो तमाम बिमारियां नई-नई हर मौसम में अलग-अलग नामों से उभर कर आ रही हैं दूसरी तरफ मिलावटी दवा कहें या उनका कम होता असर मर्ज ठीक करने में कम बिगाड़ने में जानकारों के अनुसार खराब ज्यादा कर रहीं हैं ऐसे में अमीर देशों के द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सहायता में कटौती से २.२ करोड़ मौते अतिरिक्त होने की बात सामने आ रही हैं तथा कई बिमारियां लौटकर भी आ रही बतायी जाती हैं। तो बढ़ते काम के घंटे स्वास्थ्य के लिए समय की हो रही कमी विटामिन डी आदि प्राप्त न होने से महिलाओं सहित सभी में बिमारी ज्यादा और कई बिमारियों का असर होने की बात चर्चाओं में सुनाई दे रही है। ऐसे में जब कुछ नई और कुछ पुरानी बिमारियां मुंह बाये खड़ी है हमारे सामने नई समस्या उत्पन्न करने के लिए मुझे लगता है कि कैंसर, एड्स और पूरी तौर पर समाप्त नहीं हुई टीबी आदि बिमारियों से बचाव के प्रयास हमारी सरकार स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों के साथ ही इस क्षेत्र में निरंतर नये आविश्कार कर रहे आविष्कारकों को और ज्यादा मेहनत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
ऐसे में हमें अब इस संदर्भ में उभरकर आ रही तकनीकियों जीवन और प्रतिदिन की भागमभाग और खानपान में सुधार कर जो कुछ लोग कैंसर से लड़कर पूरी तौर पर ठीक हो गये है उनसे मिलकर या विभिन्न माध्यमों से जानकारी कर उनके द्वारा अपनाये गये माध्यमों से उपयोग कर खुद से कैंसर को हराना ही नहीं दूसरों को जीतना भी सिखाना होगा। क्योंकि अब जो तथ्य उभरकर आ रहे हैं उनमें कुछ जागरूकता और कुछ एहतियात और कुछ डाक्टरों की सलाह मानकर कैंसर जैसी बिमारियों को भी हराया जा सकता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि कैंसर के मरीज बढ़ रहे है सरकारी सेवाएं सीमित है प्रदूषण बढ़ते कैंसर का कारण बन रहा है ऐसे में जरूरी है कि हम दिनचर्या में सुधार और खानपान की व्यवस्था बदलकर कैंसर व अन्य बिमारियों से जीतने का जज्बा अपने अंदर पैदा करें और सबसे बड़ी बात बिन मांगे सलाह देने वाले डाक्टरों से बचकर जिससे भी हम इलाज करा रहे है उस पर विश्वास भी रखे वही हमे ठीक करायेगा और बड़े खर्चों से बचायेगा भी तथा मुफ्त के सलाहकार बिमारिया और खर्च बढ़ाने में ही सहयोग कर सकते हैं। जाने माने कैंसर विशेषज्ञ और अब तो देशभर में इस क्षेत्र में पायी सफलता के चलते नाम कमा रहे मेरठ के डाक्टर उमंग मित्तल के द्वारा जो सुझाव दिये जाते हैं व्यक्तिगत मिलकर या ऑनलाइन बात कर दिये गये सुझावों पर अमल करें तो मुझे लगता है कि बढ़ते कैंसर के मरीजों की संख्या कम होगी क्योंकि अब समय आ गया है कि कैंसर हो या कोई अन्य बिमारी उससे डरने के बजाये समय रहते सुधार और इलाज के उपाय शुरू करें। हम हर वर्ष विश्व कैंसर दिवस मनाते हैं चिकित्सक भी सुधार के उपाय कर रहे हैं और अब भारी प्रयासों और डाक्टरों से सुझावों तथा खुद जागरूक रहकर ठीक होने की ओर अग्रसर हो सकते हैं बताते है कि वर्तमान समय में इस बीमारी में कीमों से ज्यादा इम्यूनो थैरेपी कारगार हो रही है। इससे इलाज की जंग में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार कहा जा सकता है इसलिए ना डरे ना लापरवाही करें। एहतियात के साथ अपने डाक्टरों की सलाह मानकर आगे बढ़े भगवान आपकी बिमारियां ठीक करेगा और आप पुनरू स्वथ्य होकर अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी सकते हैं। इस संदर्भ में विश्व प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक ईश्वर सिंह का कहना है कि अब कैंसर सहित सभी बिमारियों में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति कारगार है। इस लिये निराश होने के बजाये गूगल पर जाकर होम्योपैथी आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति का भी अध्ययन करें और कुछ अच्छा नजर आता है तो अपने डाक्टरों की राय से उसे भी अपना सकते हैं सही होने के लिए और आवश्यकता समझे तो अपने से संबंध अन्य चिकित्सों के साथ ही जानेमाने सर्जन डा. तनुराज सिरोही व आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डा. एमके बंसल से भी सलाह कर सकते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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