नई दिल्ली, 17 फरवरी। ऑनलाइन गुणवत्ता रहित खिलौने बेचना अब आसान नहीं रह गया है। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने सख्त कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन कंपनी स्नैपडील पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी द्वारा बिना गैर मानकों वाले खिलौने बेचे जा रहे थे।
सीसीपीए ने अमेजन और फ्लिपकार्ट को भी नोटिस भेजकर नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। प्राधिकरण की इस कार्रवाई का संकेत है कि अब ऑनलाइन बाजार में भी कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा। जाहिर है, बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं होगा।
ऑनलाइन कंपनियां बहाने बनाकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं। नियमों का पालन करना ही होगा, वरना कार्रवाई तय है। बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने खिलौनों की गुणवत्ता को लेकर पहले ही साफ नियम बना रखे हैं।
खिलौना (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश-2020 के तहत पहली जनवरी 2021 से देश में बिकने वाले हर खिलौने पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) का प्रमाणन जरूरी है, जो इस बात की गारंटी होगी कि खिलौना सुरक्षित होने के साथ ही तय मानकों पर भी खरा है। ऐसा नहीं होने पर गलत व्यापार-व्यवहार की श्रेणी में आएगा।
सीसीपीए की जांच में पाया गया कि स्नैपडील पर कुछ ऐसे खिलौने सूचीबद्ध थे जिनके पास जरूरी प्रमाण नहीं था। कई उत्पादों की जानकारी अधूरी थी। जैसे निर्माता का नाम, पता और प्रमाणन संख्या दर्ज नहीं थी।
कंपनी का तर्क था कि वह सिर्फ एक ऑनलाइन बाजार की तरह काम करती है, जहां विक्रेता अपने सामान खुद बेचते हैं, लेकिन प्राधिकरण ने इस दलील को खारिज कर दिया।
उसका कहना है कि जब कोई मंच किसी उत्पाद का प्रचार करता है। तरह-तरह के आफर देता है। सामान की गुणवत्ता और मूल्य को लेकर दावे करता है। पैसे के लेन-देन और वापसी की प्रक्रिया संभालता है तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह सही खिलौने बेचे।
जांच में यह भी सामने आया कि जिन विक्रेताओं के जरिए ये खिलौने बेचे गए, उनसे कंपनी ने करीब 41 हजार रुपये शुल्क के रूप में कमाए। यानी प्लेटफार्म को लेन-देन से लाभ भी हुआ। ऐसे में यह कहना कि उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती, सही नहीं माना गया।
सीसीपीए ने स्नैपडील को साफ निर्देश दिए कि आगे से बिना प्रमाणन वाले खिलौने उसके मंच पर न दिखें, न बिकें और न उनका प्रचार हो। ग्राहकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था फोन नंबर, ईमेल एवं शिकायत अधिकारी की जानकारी भी प्रमुखता से दिखानी होगी।
यह मामला किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है। अमेजन और फ्लिपकार्ट समेत अन्य ऑनलाइन कंपनियों को भी नोटिस भेजे गए हैं। सरकार का उद्देश्य साफ है कि ऑनलाइन बाजार में उपभोक्ताओं को वही सुरक्षा मिले जो किसी दुकान से खरीदते समय मिलती है।
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