कोटद्वार, 06 जून (ता)। उत्तराखंड की पावन धरती को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां के कण-कण में देवताओं का वास है और हर पर्वत शिखर किसी न किसी दिव्य शक्ति की कहानी बयां करता है। देवभूमि के कोटद्वार में, श्री सिद्धबली हनुमान जी विराजमान हंै। यह एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों भक्तों की अटूट आस्था, मौन साधना और चमत्कारी कल्पवृक्ष का केंद्र है। मान्यता है कि यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता और बाबा सिद्धबली झोली को खुशियों से भरते हैं। प्राकृतिक सुंदरता के बीच बना यह मंदिर भक्तों को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। यहां हर दिन दूर-दूर से श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं।
खोह नदी तट पर स्थित यह मंदिर 84 सिद्धपीठों में से एक है। मंदिर को लेकर पौराणिक कहानियां भी हैं, जिसके अनुसार एक बार गुरु गोरखनाथ (कलियुग में शिव के अवतार) अपने गुरु मछेंद्रनाथ को मुक्त कराने के लिए जा रहे थे। इसी स्थान पर बजरंगबली ने रूप बदलकर उनका रास्ता रोक लिया, जिसके बाद दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। जब युद्ध में कोई पराजित नहीं हुआ, तब हनुमान जी अपने वास्तविक रूप में आए और वचन दिया कि वे इस स्थान पर सदैव प्रहरी के रूप में विराजमान रहेंगे। इसी स्थान पर तपस्या के बाद सिद्ध बाबा नामक पूजनीय संत को हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए थे और सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। उन्हीं सिद्ध संत (सिद्ध बाबा) और हनुमान जी के सम्मिलित रूप को ‘सिद्धबली’ कहा गया।
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