संभल 22 जनवरी। जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा पर प्रशासन ने शिकंजा और कस दिया है। बुधवार सुबह पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने भारी फोर्स के साथ दीपा सराय स्थित साठा के पैतृक घर पर कुर्की की कार्रवाई की। कोर्ट के आदेश पर मकान के उस एक चौथाई हिस्से को सील कर दिया गया, जिसमें साठा अपनी पत्नी के साथ रहता था। इस दौरान एसपी ने खुद मोर्चा संभाला और पूरे क्षेत्र की ड्रोन कैमरे से निगरानी की गई।
गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के बाद कोतवाली पुलिस ने शारिक साठा के खिलाफ चार लोगों की हत्या के अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। वह सभी मामलों में फरार चल रहा है। दो हत्याओं के मामलों में उसके घर पर पहले ही कुर्की का नोटिस चस्पा हो चुका था। बीते वर्ष 30 नवंबर को हिंसा के शिकार अयान की मौत से जुड़े मुकदमे में भी उसके घर पर तीसरा उद्घोषणा नोटिस चस्पा किया गया, जिसकी मियाद पूरी होने पर न्यायालय ने 13 जनवरी को कुर्की के आदेश जारी किए थे। बुधवार सुबह तहसीलदार धीरेंद्र कुमार और एएसपी कुलदीप सिंह के नेतृत्व में पांच थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी दीपा सराय पहुंची। सीओ ने ढोल पिटवाकर कोर्ट के आदेश की मुनादी कराई। पैतृक आवास के जिस हिस्से में साठा निवास करता था, उसे सील कर वहां रखा सारा सामान जब्त कर लिया गया।
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि साठा के खिलाफ 69 मुकदमे दर्ज हैं। वह जंगी ऐप से गुर्गों के संपर्क में था। परमानेंट वारंट जारी हो चुका है, अब रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराकर उसे जल्द भारत लाया जाएगा।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शारिक साठा वर्ष 2020 से भारत से बाहर फरार है. दिल्ली की जेल से छूटने के बाद वो फर्जी पासपोर्ट बनवा कर दुबई चला गया था.
साठा की पत्नी के नाम के प्लाट की हुई थी कुर्की, बनेगा सीओ दफ्तर
साठा ने अवैध रूप से धन अर्जित कर अपनी पत्नी गुलेरोशन के नाम से और उसके साथी व साढ़ू सिकंदर ने अपनी पत्नी सजा परवीन के नाम से तुर्तीपुर इल्हा में 268 वर्गगज भूमि खरीदी थी। यह संपत्ति हसनपुर रोड पर प्राइम लोकेशन पर स्थित थी, जिसकी बाजार कीमत करीब 2.31 करोड़ रुपये है। यह भूमि वर्ष 2011 में गैंग्स्टर एक्ट के तहत निरुद्ध करते हुए कुर्क हुई थी।
उस दौरान जिलाधिकारी न्यायालय ने इस संपत्ति को जब्त कर लिया था। इसके बावजूद दोनों महिलाओं को कई बार यह साबित करने का अवसर दिया गया था कि यह संपत्ति वैध रूप से अर्जित की गई है, लेकिन कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने पर एडीजे गैंग्स्टर एक्ट कोर्ट ने धारा 15 के अंतर्गत इसे सरकार में निहित करने का आदेश सुना दिया था।
अब यह भूमि प्रशासन के अधीन है। वर्तमान में वहां एक कमरे का पुलिस चेक पोस्ट बना हुआ है। मगर, इस भूमि को अब पुलिस विभाग के लिए आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। फिर इस पर सीओ कार्यालय बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

