नई दिल्ली 13 जुलाई। विपक्षी दलों की चिंताओं के बीच संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री को गंभीर अपराधों के आरोप में 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है तो उन्हें उनके पद से हटाने के बजाय निलंबित किया जाना चाहिए। समिति ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि यदि ऐसे व्यक्तियों को बरी किया जाता है या मुकदमे की कार्यवाही निर्धारित समय के भीतर आगे नहीं बढ़ती है तो निलंबन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
130वें संविधान संशोधन विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त समिति ने दो खास और तीन सामान्य सिफारिशें की हैं। पिछले साल अगस्त में पेश किए गए इस विधेयक में प्रविधान है कि यदि प्रधानमंत्री, मंत्री या मुख्यमंत्री हिरासत में रहने के 31वें दिन तक इस्तीफा नहीं देते हैं तो उन्हें स्वतः पद से हटा दिया जाएगा। विपक्ष ने इस विधेयक को विरोधी दलों की सरकारों को अस्थिर करने का एक साधन बताया था। विपक्ष के अधिकांश दलों ने विधेयक की समीक्षा करने वाली संयुक्त समिति से दूरी बना ली थी। बड़े स्तर पर हितधारकों ने भी कहा था कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने का प्रविधान असंवैधानिक और समस्यापूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह प्रविधान दोषी करार दिए जाने के किसी अंतिम न्यायिक फैसले से अलग है।
इस रिपोर्ट के इस सप्ताह स्वीकृत किए जाने की संभावना है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रस्ताव दिया है कि ‘पद से हटाना’ शब्द को ‘निलंबन’ से बदला जाए। इसका तात्पर्य है कि जिन मंत्रियों पर विशिष्ट आपराधिक आरोप हैं, उन्हें कानूनी कार्यवाही का फैसला आने तक स्थायी रूप से पद से हटाने के बजाय निलंबित किया जाना चाहिए। इसमें ‘गंभीर अपराधों की परिभाषा में कहा गया है कि इसका तात्पर्य उन अपराधों से है, जिनके लिए पांच वर्ष या उससे अधिक की कारावास की सजा हो सकती है। निलंबन के स्वतः समाप्त होने का प्रविधान भी प्रस्तावित किया गया है। यदि मंत्री बरी हो जाते हैं या मुकदमे की कार्यवाही निर्धारित समय के भीतर आगे नहीं बढ़ती है, तो निलंबन स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए। संविधान समिति ने कहा कि यह सुरक्षा उपाय दोबारा नियुक्ति सुनिश्चित करता है और यह भी ध्यान रखता है कि जिन लोगों को अदालतें दोषी नहीं पातीं, उनका निलंबन स्थायी न हो।
उच्च संवैधानिक पदों से जुड़े मामलों की सुनवाई त्वरित अदालतों में हो
संयुक्त समिति ने यह भी सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से जुड़े मामलों की सुनवाई त्वरित या विशेष अदालतों में होनी चाहिए। समिति ने कहा कि प्रस्तावित कानून में एक अलग अनुसूची होनी चाहिए जिसमें पांच साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध शामिल हों ताकि उन अपराधों की साफ पहचान हो सके, जिनके कारण निलंबन हो सकता है। यह विधेयक यह सुनिश्चित करने के लिए पेश किया गया था कि सरकारें जेल से न चलाई जाए। यदि सिफारिशें मान ली जाती है तो गृह मंत्रालय प्रस्तावित संशोधनों के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास जाएगा और बाद में लोकसभा में आधिकारिक तौर पर संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा।

