मुंबई, 12 मार्च (दि)। बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार का कहना है कि जब आप किसी की मदद करते हैं, तो यह आपका सौभाग्य होता है कि आप ऐसा कर पाए। टीवी शो व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया पर एक भावुक पल देखने को मिला, जब वरिष्ठ पत्रकार सोनल कलरा ने अभिनेता अक्षय कुमार से जुड़ी एक खास कहानी साझा की। इस किस्से ने अक्षय कुमार के उस पहलू को सामने लाया, जिसके बारे में वह अकसर बात करना पसंद नहीं करते। सोनल कलरा ने कहा कि वह अक्षय कुमार को करीब 20 साल से जानती हैं और उन्होंने उनके व्यक्तित्व का एक अलग ही पक्ष देखा है।
उन्होंने लॉकडाउन के दौरान की एक घटना याद करते हुए कहा कि उस समय देश में कोरोना महामारी के कारण लोग पहले ही परेशान थे, वहीं बिहार और असम में भयंकर बाढ़ की स्थिति भी थी। सोनल कलरा ने अक्षय को बताया कि लोग लॉकडाउन से चिंतित हैं और उसी समय बिहार और असम में बाढ़ ने हालात और कठिन बना दिए हैं। अचानक अक्षय ने मुझसे कहा कि क्या आप मुख्यमंत्री कार्यालय का नंबर ढूंढ सकती हैं? सोनल कलरा ने अपने सूत्रों से नंबर का इंतजाम किया और अक्षय कुमार को दे दिया। कुछ ही घंटों बाद उन्हें एक राजनीतिक पत्रकार का फोन आया, जिसमें पूछा गया कि क्या यह सच है कि अक्षय कुमार ने बिहार और असम के मुख्यमंत्री राहत कोष में एक-एक करोड़ रुपए दिए हैं। जब उन्होंने इस बारे में अक्षय कुमार से पूछा, तो अभिनेता ने इसे ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि मैंने पैसे दिए हैं, लेकिन इसे दान मत कहिए। मंच पर इस बारे में बात करते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि मुझे हमेशा लगता है कि ‘चैरिटी’ या ‘डोनेशन’ शब्द सबसे खराब शब्द हैं। जब आप किसी की मदद करते हैं, तो यह आपका सौभाग्य होता है कि आप ऐसा कर पाए। उन्होंने कहा कि भगवान ने आपको किसी की सेवा करने लायक बनाया है। इसलिए इसे दान नहीं, बल्कि सेवा कहना चाहिए। इस बातचीत ने दर्शकों को भावुक कर दिया और यह याद दिलाया कि असली मायने में मदद वही है, जिसके बारे में अकसर शोर नहीं किया जाता। अक्षय कुमार ने इसे एक साधारण सेवा की तरह देखा, लेकिन इस कहानी ने यह दिखा दिया कि कई बार किसी व्यक्ति के सबसे बड़े काम वही होते हैं, जिनका वह खुद कभी जिक्र नहीं करता।
Trending
- शादी में एक-दो नहीं बजा दिए चार डीजे, दीवार गिरने से दो बच्चों समेत कई दबे
- देश में पहली इच्छामृत्यु की अनुमति का निर्णय है जनहित का, ऐसे मामलों में फैसले लेने में
- डॉ दिनेश शर्मा जी मां बाप सरकारी कर्मचारियों के ही नहीं अन्य क्षेत्रों में काम करने वालों के भी होते हैं इसलिए यह सुविधा सबको उपलब्ध हो ऐसी मांग अगर आप करें तो अच्छा है
- जिंदा आरोपी को मृत दिखाने में फंसे पुलिसकर्मी; कोर्ट के आदेश पर 6 के खिलाफ केस दर्ज
- क्रांति प्रकाश झा ने नाना पाटेकर के साथ अपने ड्रीम कोलैबोरेशन पर की बात
- जिसके अंतिम संस्कार की चल रही थी तैयारी गढ्डें में एम्बुलेंस के झटके से ब्रेनडेड महिला की चलने लगी सांसे
- असली मदद वही है, जिसके बारे में शोर न किया जाए : अक्षय कुमार
- एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर भारतीय रेल की खानपान सेवाओं पर भी

