चौधरी सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण को लेकर सकौती में हुई अंतरराष्ट्रीय जाट समाज के सम्मेलन में बहन बेटी की शादी को लेकर अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के संस्थापक रामाअवतार पलसानिया द्वारा की गई टिप्पणी को लेकर चौधरी चरण सिंह के प्रशंसकों व रालोद नेताओं व कार्यकर्ताओं में नाराजगी है जो होनी भी चाहिए। जबकि अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के इस बयान से पल्ला झाड़ते हुए इसे पलसानिया का निजी बयान बताया गया है। जाट महासभा के राष्ट्रीय सचिव युद्धवीर सिंह ने कहा कि किसानों के मसीहा पर ऐसी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं तो दूसरी ओर राम अवतार पलसानिया ने अपने बयान पर मचे बवाल के बाद सोशल मीडिया पर लाइव आकर कहा कि चौधरी चरण सिंह का जीवन भर सम्मान करते रहेंगे वो मेरे आदर्श हैं और रहेंगे। अगर मेरे शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है तो अपने शब्द वापस लेता हूं। लेकिन अभी तक रालोद नेता और कार्यकर्ताओं व पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के समर्थकों में भारी आक्रोश है। उनके द्वारा किए जा रहे आंदोलन के तहत पलसानिया पर एफआईआर कराकर उनकी गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। इस बारे में जगह जगह मीटिंग और थानों के घेराव भी हुए जिनमें पलसानिया के बयान की निंदा की जा रही है। जो भी हो यह सभी जानते हैं कि पलसानिया द्वारा माफी मांगने और चौधरी साहब को अपना आदर्श बताने के बाद देर सवेर यह प्रकरण शांत भी हो जाएगा क्योंकि पलसानिया भी इसी समाज से हैं। चौधरी साहब को वह अपना नेता मानते रहे हैं। मगर सवाल यह उठता है कि चौधरी साहब तो जीवन भर सिद्धांतों पर चले और उन्हें लागू कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी गई। अब पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह की बात है तो उनके योगदान को भी कम करके नहीं आंका जा सकता।
सकौती स्थित हितकारी इंटर कॉलेज में एक अहम बैठक कर अखिल भारतीय जाट महासभा के अध्यक्ष रोहित जाखड़ ने कहा कि भारत रत्न चौधरी साहब का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं। उन्होंने कहा कि पलसानिया की यूपी में एंट्री प्रतिबंधित की जाएगी। और आरोप लगाया कि महाराजा सूरजमल की स्थापना के नाम पर कार्यक्रम को राजनीतिक रंग दिया गया। तो इस बैठक में चंदे पर भी सवाल उठे।
तमाम समाचार पत्रों ने जो इस बारे में छापा वो तो अलग बात है लेकिन यह बात विश्वास से कही जा सकती है कि चौधरी चरण सिंह साहब दलित मजदूर किसानों के साथ ही सर्वसमाज के नेता थे। सिर्फ जाट समाज के नहीं। इसलिए राम अवतार पलसानिया की टिप्पणी से सर्वसमाज के लोगों को बुरा लगा है। जहा तक मैंने देखा चौधरी चरण सिंह गरीब अमीर बनिया ब्राहमण को भी साथ लेकर चलने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। इसलिए उन पर यह आरोप बिल्कुल गलत और राजनीतिक कह सकते हैं जिसे लेकर पलानिया माफी भी मांग चुके हैं। अभी रालोद ने धरना प्रदर्शन किए हैं लेकिन यह मामला अगर समाप्त नहीं होता तो यह बात विश्वास से कही जा सकती है कि माफी मांगने के बाद भी अगर यह मुददा आगे बढ़ता है तो इसमें चौधरी साहब के प्रशंसको और कार्यकर्ता नेता भी उसमें शामिल होने में पीछे नहीं होंगे। वर्तमान में केंद्रीय मंत्री चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी पर भी आज तक कोई ऐसा आरोप नहीं लगा जो समाज के लिए गलत हो। या किसी का अपमान करता हो। जयंत चौधरी में चौधरी चरण सिंह की छवि उनके प्रशंसक देखते हैं। सभी राजनीतिक दलों के नेता भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ जमकर खड़ें होंगे। लेकिन फिलहाल मुझे लगता है कि जब अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के अध्यक्ष राम अवतार पलसानिया सार्वजनिक रुप से माफी मांग चुके हैं और चौधरी चरण सिंह को अपना आदर्श मानने की बात उनके द्वारा कही जा रही है तो इस मामले का समापन कर रालोद की एकता और मजबूती के लिए काम करते हुए चरण सिंह के सपनों को पूरा करने का प्रयास किया जाना चाहिए। यही सबके हित में और संगठित करने के लिए उचित कह सकते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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