लखनऊ 01 जून। यूपी में चार वर्ष बाद पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए तीन नामों के पैनल में शामिल अब तक कार्यवाहक डीजीपी के रूप में काम कर रहे राजीव कृष्ण के नाम पर ही पूर्णकालिक डीजीपी के रूप में तैनाती के लिए मुहर लगा दी। अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद की ओर से राजीव कृष्ण को यूपी पुलिस का विभागाध्यक्ष नियुक्त किए जाने का आदेश जारी किया गया है।
यूपीएससी ने मंगलवार को दिल्ली में हुई बैठक में यूपी में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति के लिए वरिष्ठता क्रम के आधार पर डीजी स्तर के अधिकारियों के नामों पर विचार कर तीन नामों का पैनल राज्य सरकार को भेजा था। पैनल में वरिष्ठता क्रम में सबसे आगे 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनन्द और राजीव कृष्ण के नाम शामिल थे। डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए राजीव कृष्ण का नाम चुना जाना ही तय माना जा रहा था। यूपी में इससे पहले मुकुल गोयल को पूर्णकालिक डीजीपी के रूप में तैनाती मिली थी।
राजीव कृष्ण एक जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे थे। 1991 बैच के आईपीएस राजीव कृष्ण पुलिस महकमे में लंबे प्रशासनिक और मैदानी अनुभव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और जोनों में जिम्मेदारियां संभाली हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और यूपीएससी की व्यवस्था के अनुसार स्थायी डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष का होता है। ऐसे में नियुक्ति होने पर राजीव कृष्ण 2028 तक इस पद पर बने रह सकते हैं। वर्ष 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को हटाए जाने के बाद से प्रदेश में स्थायी डीजीपी का इंतजार हो रहा था।
अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में राजीव कृष्ण ने कई अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। उनकी छवि एक कर्मठ अधिकारी की रही है। प्रदेश का कार्यवाहक डीजीपी बनने से पहले वे डीजी इंटेलिजेंस और पुलिस भर्ती बोर्ड के चेयरमैन जैसे दो पदों की जिम्मेदारियां एक साथ संभाल रहे थे। राजीव कृष्ण की गिनती शासन के करीबी और भरोसेमंद अफसरों में होती है।
राजीव कृष्णा लखनऊ, मथुरा, इटावा, आगरा और नोएडा समेत कई जिलों के पुलिस कप्तान भी रह चुके हैं।

