सर्दी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। जिससे बचने के लिए हर व्यक्ति इंतजाम करने और बचाव में लगा है। फिर भी हाड़ कंपाने वाली ठंड आसानी से पीछा छोड़ने वाली नहीं लगती।
वर्ष में सर्दी गर्मी हो या बरसात सब खूब पड़ने लगी है। ऐसा हर साल ही होता है इसलिए इससे घबराने वाली तो कोई बात है नहीं क्योंकि भगवान जिसे जिस हाल में रखता है उसे हर मौसम का प्रकोप झेलने की ताकत भी देता है इसलिए गरीब और मजदूर व उनके बच्चे गर्मी में पहने जाने वाले कपड़े पहने और खेलते देखे जा सकते हैं। बच्चे अपनों को सब प्यारे है इसलिए हर कोई इंतजाम कर रहा है। आज खबर पढ़ी कि एक आदमी आधुनिक उपायों से कमरे में गर्मी बढ़ने से मर गया तो शामली के ज्वालागंज मंडी निवासी राहुल वर्मा के साढ़े १३ साल के पुत्र सार्थक वर्मा की बाथरूम में नहाते समय मौत हो गई। स्कूली छात्र की मौत के लिए चिकित्सक हार्ट फेल होने की बात कह रहे हैं। उनका मत है कि ठंड से यह हुआ। कई बार खबर पढ़ने को मिलती है कि गीजर की गैस या अंगीठी जलाकर रखने से या हीटर चलाकर सोने से भी मरने की खबरें मिलती रहती हैं। मेरा मानना है कि सभी को अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खेल खेलने के साथ ही योग व पैदल व साईकिल चलाने की कोशिश करनी चाहिए। समयानुसार कपड़े पहने और खाने पीने का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि साढ़े १३ साल के बच्चे की ठंड से मौत की खबर से आत्मा तक हिल जाती है। हमें सर्दी से बचने के लिए उपाय करने के साथ उससे नुकसान ना हो इस बात का भी ध्यान रखा जाए तो मुझे लगता है कि सर्दी से बचा जा सकता है। बाकी सर्दी से बचने के लिए डॉक्टर से राय लें। लेकिन अहतियात और बचाव वक्त की सबसे बड़ी मांग है और इस पर ध्यान देना ही चाहिए
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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