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    Home»देश»प्राइवेट संस्थानों की तुलना सरकारी कालेजों से नहीं की जा सकती है : कोर्ट
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    प्राइवेट संस्थानों की तुलना सरकारी कालेजों से नहीं की जा सकती है : कोर्ट

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJune 25, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ली, 25 जून (ता)। सुप्रीम कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस इनकम लिमिट और प्राइवेट मेडिकल कालेजों के फीस स्ट्रक्चर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कैटेगरी के लिए आठ लाख रुपए सालाना आय की सीमा और प्राइवेट मेडिकल कालेजों की भारी फीस भरने पर सवाल उठाया गया था। याचिका में कहा गया था कि ईडब्ल्यूएस क्राइटेरिया के तहत क्वालिफाई करने वाले कई छात्र एमबीबीएस कोर्स का खर्च नहीं उठा सकते, क्योंकि इनकी सालाना फीस लगभग 19 लाख रुपए से 25 लाख रुपए तक हो सकती है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट संस्थानों को सरकारी कालेजों जैसी फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
    प्राइवेट कालेज सरकारी जैसे नहीं हो सकते हैं। यहां इस मामले की डिटेल देखते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें निजी मेडिकल कालेजों की फीस संरचना को सही माना गया था। यह मामला निजी मेडिकल कालेजों की बहुत ज्यादा फीस को लेकर था। यह भी तर्क था कि इतनी ज्यादा फीस होने की वजह से रिजर्वेशन के लिए योग्य होने के बाद भी कई ईडब्ल्यूएस कैंडीडेट्स मेडिकल की पढ़ाई से दूर हो जाते हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि प्राइवेट और सरकारी शिक्षण संस्थान मूल रूप से अलग-अलग फाइनांशियल मॉडल पर काम करते हैं, इसलिए उन पर एक जैसा फीस स्ट्रक्चर लागू नहीं किया जा सकता।
    कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति आकर यह नहीं कह सकता कि प्राइवेट संस्थानों की फीस बहुत ज्यादा है, इसलिए उसे सरकारी संस्थानों जैसा कर दिया जाए। सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है, जबकि निजी संस्थान खुद की फंडिंग से चलते हैं। इसलिए प्राइवेट संस्थानों की तुलना सरकारी कालेजों से नहीं की जा सकती है।

    Court Order Desh New Delhi Private institutions cannot be compared to government colleges: Court tazza khabar tazza khabar in hindi
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