शासन और सरकार कैसे चलानी है। सरकारी अधिकारियों से कैसे काम लेना है यह सोचना और देखना उच्च पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों और सरकारी अफसरों का काम है लेकिन जब कोई बात या खबर पढ़ने सुनने को मिलती है और लगता है कि यह सही नही है तो हो सकता है कि नियम बनाने वालों के लिए ठीक हो और मुझ जैसे कम सोच वालों के कम और जो नियम कानून वालों के लिए है लेकिन एक चर्चा सुनने को मिलती हेै कि अगर कुछ मन में आए और उस पर चर्चा ना की जाए तो बदहजमी होती है और सोच भी कुंद हो जाती है। आज अखबार में समाचार पढ़ा कि अग्निवीरों ने शादी की तो स्थायी नहीं हो पाएंगे। इससे जिज्ञासा तो होनी ही थी क्योंकि शादी परिवारों को बांधने और सेवा भाव से काम करने की प्रेरणा देती है। शादी के अनेको फायदे होते हैं और अपने मन की बात कहने सुनने के लिए एक साथी मिल जाता है। हम बात कर रहे हैं २०२२ में तीनों सेनाओं में अग्निवीर योजना के तहत हुई भर्ती जिसका उस समय बहुत विरोध भी हुआ था लेकिन हम तब भी इसके समर्थन में थे और आज भी हैं। उस समय भर्ती हुए अग्निवीरों के पहले बैच का सेवाकाल खत्म हो रहा है। और इनमें से इनके कार्य की समीक्षा कर २५ फीसदी को वापस सेना में लिया जाएगा। मगर जो पढ़ने को मिला है उससे पता चला कि अगर इस अवधि में कोई अग्निवीर विवाह कर लेता है तो वह स्थायी सैनिकों के लिए अयोग्य माना जाएगा। सवाल उठता है कि चार साल का कार्य पूरा करने वाले २५ फीसदी सैनिकों को आगे का सेवाकाल मिलेगा और इस हिसाब से तीनों सेनाओं में जो २० हजार से ज्यादा अग्निवीर भर्ती हुए थे वह जून जुलाई में अपना कार्यकाल पूरा कर बाहर आएंगे। सवाल उठता है कि आखिर उनके विवाह करने पर ऐतराज क्यों। जब यह भर्ती हुए तो २१ वर्ष की आयु रही होगी। चार साल की सेवा के बाद २५ साल के हो गए। यह उम्र शादी के लिए सही मानी गई है। तो फिर इनमें से विवाह करने वालों को सेवाकाल आगे बढ़ाने में कठिनाई क्या है। खबर के अनुसार सेवानिवृत हो रहे और जब तक स्थायीकरण के नतीजे नहीं आते तब तक इनके विवाह करने पर रोक रहेगी। मैं कोई ज्ञानवान तो नहीं हूं और ना सरकारी नियम का विरोध कर रहा हूं लेकिन मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो शादी करना ना करना निजी मामला है। अगर शादी के बाद वह सेवा विस्तार के मानकों पर नहीं उतरता तो उसे भर्ती से वंचित रखा जाए तो शायद किसी को कोई ऐतराज नहीं होगा क्योंकि नियमों का पालन करना हर आदमी की जिम्मेदारी है। मेरा युवाओं को आगे बढ़ाने वाले और पूर्ण जमीनी ज्ञान रखने वाले देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तथा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से आग्रह है कि इस ओर ध्यान देकर विवाह रोक संबंधी नियमों की दोबारा समीक्षा हो। अगर इससे कहीं भी किसी प्रकार से व्यवस्था का उल्लंघन होता हो तो बात दूसरी है वरना चार साल मेहनत कर बाहर निकले सैनिकों को पुनविस्तार उनकी शादी से संबंध ना कर उनकी काबिलियत के आधार पर तय किया जाए लेकिन शादी से वंचित किसी को ना किया जाए तो अच्छा है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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