कानपुर, 18 मई (प्र)। कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा को लेकर सियासत तेज हो गई है। सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अपने खून से पत्र लिखकर प्रतिमा की स्थापना को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मेट्रो निर्माण के दौरान हटाई गई प्रतिमा आज तक दोबारा स्थापित नहीं की गई, जबकि इस मुद्दे पर कई बार प्रशासन को पत्र लिखे जा चुके हैं।
आईएएनएस से बातचीत में अमिताभ बाजपेयी ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा लगी हुई थी। मेट्रो का काम शुरू होने से पहले ही उसे हटा दिया गया था, लेकिन जब मेट्रो का काम पूरा हुआ तो हम प्रतिमा की खोज करने लगे। प्रतिमा खोजने के लिए हम लोगों ने अभियान भी चलाया। उन्होंने कहा कि इस अभियान के शुरू होने के बाद प्रतिमा रखने वाले लोग खुद सामने आ गए और गुंडागर्दी करने लगे। प्रशासन उनसे प्रतिमा तक नहीं ले पाया। डीएम को पत्र लिखा गया। प्रतिमा स्थापित करने की जगह बदल दी गई, हमने सब स्वीकार कर लिया, लेकिन अभी तक प्रतिमा स्थापित नहीं की गई।
सपा विधायक ने कहा कि प्रतिमा चोर शहर में घूम रहे हैं, लेकिन प्रशासन न उन्हें पकड़ पा रहा है और न ही प्रतिमा बरामद कर पा रहा है। ऐसे में आज हम खून से पत्र लिखने पर मजबूर हुए हैं। उन्होंने कहा कि पेन से मैंने कई बार चिट्ठी लिखी, लेकिन उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है, इसलिए मैंने अपने खून से चिट्ठी लिखने की कोशिश की है। शायद अधिकारियों को उनकी बात समझ आ जाए। उत्तर प्रदेश में कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे में हो रही देरी पर अमिताभ बाजपेयी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार के दोनों इंजन आपस में टकरा रहे हैं। ये सत्ता की टकराहट है। पहले भी जो लोग मंत्री बने थे। वो केंद्र की मर्जी से बने थे और इस बार भी केंद्र की मर्जी से ही लोग मंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर अहम विभाग तो मुख्यमंत्री के पास हैं। अगर मंत्रियों को विभाग देना है तो इन्हीं में से ही देना होगा। सीएम काम बांटना नहीं चाहते और दूसरों को अहम विभाग देना नहीं चाहते हैं। इसीलिए दिक्कतें आ रही हैं। ये जो लोग मंत्री बने हैं। ये कुछ गाड़ियों और सिपाहियों के लिए मंत्री हैं, इन्हें जल्दी विभाग तो नहीं मिलने वाला।
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