Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • यूपी के ‘दो लड़कों’ को आकाश आनंद ने बताया अंकल
    • जीएसटी ऑफिसर्स सर्विस एसोसिएशन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का समय मांगेगा
    • आज शाम से खुलेगा दिल्ली एक्सप्रेसवे और हाईवे
    • शिवरात्रि पर सुबह से ही झमाझम बारिश
    • भोले की भक्ति में डूबी रामनगरी अयोध्या, तीन लाख श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक
    • अतिवृष्टि से तमक नाला उफनाया, बैली ब्रिज बहा, चीन सीमा से संपर्क कटा, बीआरओ का कर्मचारी लापता
    • आज रात से बाबा औघड़नाथ मंदिर में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
    • हल्की बारिश होने पर उमस से लोगों को राहत, अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना रहा
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»न्यूज़»स्थायी प्रकृति के कार्य दशकों तक आउटसोर्सिंग के जरिये कराना कर्मचारियों के अधिकारों का हनन : कोर्ट
    न्यूज़

    स्थायी प्रकृति के कार्य दशकों तक आउटसोर्सिंग के जरिये कराना कर्मचारियों के अधिकारों का हनन : कोर्ट

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMarch 24, 2026No Comments3 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    प्रयागराज, 24 मार्च (दप्रि)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकारी नियोक्ताओं द्वारा नियमित भर्ती प्रक्रिया को दरकिनार कर आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों से लंबे समय तक काम लेने की प्रथा की निंदा की। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने इस संबंध में एक रिट याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि इस तरह की व्यवस्था शोषण और अन्याय के लिए व्यापक गुंजाइश उपलब्ध कराती है।
    कैफी अहमद खान द्वारा दायर याचिका पर अदालत ने बरेली नगर निगम को उसकी सेवा को नियमित करने पर विचार करने का निर्देश दिया। खान पिछले 13 वर्षों से आउटसोर्स कर्मी के तौर पर बतौर कंप्यूटर ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
    अदालत ने कहा कि नियोक्ता द्वारा सतत रूप से आउटसोर्स के आधार पर व्यक्ति को काम पर रखना जहां कार्य अपरिहार्य प्रकृति के हैं, से संकेत मिलता है कि यह शोषणात्मक है खासकर तब जब विभाग का काम आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए मानव संसाधन द्वारा किया जाता है। इससे मंजूर पद पर नियमित कर्मचारी की नियुक्ति टाली जा रही है। वर्ष 2019 में याचिकाकर्ता की रिट याचिका उच्च न्यायालय द्वारा अधिकारियों को उसके दावे पर विचार करने का निर्देश देकर निस्तारित कर दी गई थी। हालांकि, नगर आयुक्त ने दिसंबर, 2020 में उसके दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
    अधिकारी ने फरवरी, 2016 के सरकारी आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि 31 दिसंबर, 2001 को या इससे पूर्व नियुक्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने की कानूनी रूप से अनुमति है। याचिकाकर्ता के वकील ने उच्चतम न्यायालय द्वारा 2024 में जग्गो बनाम केंद्र सरकार के मामले में दिए गए निर्णय का हवाला दिया जिसमें शीर्ष अदालत ने सरकारी संस्थानों द्वारा लंबे समय तक अस्थायी आधार पर कर्मचारियों को रखने की प्रथा की आलोचना की थी जिससे विभिन्न श्रम अधिकारों का उल्लंघन होता है।
    अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को लंबे समय तक रोजगार में बनाए रखना इस बात का संकेत है कि वह कार्य स्थायी प्रकृति का है और नियमित करने से इनकार मनमाना है। पीठ ने प्रतिवादी संख्या 3-नगर आयुक्त, नगर निगम, बरेली द्वारा पारित आदेश को दरकिनार कर दिया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को नियमित करने के उसके दावे पर चार सप्ताह के भीतर विचार किया जाए।

    Court Order prayagraj tazza khabar tazza khabar in hindi Uttar Pradesh
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    websitemarketing2019@gmail.com
    • Website

    Related Posts

    यूपी के ‘दो लड़कों’ को आकाश आनंद ने बताया अंकल

    August 11, 2026

    जीएसटी ऑफिसर्स सर्विस एसोसिएशन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का समय मांगेगा

    August 11, 2026

    आज शाम से खुलेगा दिल्ली एक्सप्रेसवे और हाईवे

    August 11, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.