नई दिल्ली, 24 जून (ता)। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने गत दिवस कहा कि ब्रिक्स केवल देशों के समूह से कहीं ज्यादा है। उन्होंने इसे दुनिया की लगभग आधी आबादी का एक सामूहिक घर बताया, जिसकी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में “खास भूमिका” है। खासतौर से ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय सिस्टम बढ़ती अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव और बदलते सुरक्षा खतरों का सामना कर रहा है।
16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सालहकारों की मीटिंग में एनएसए अजित डोभाल ने अपने समकक्षों का स्वागत किया और सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने समूह के अंदर सहयोग को आगे बढ़ाने में लगातार जुड़े रहने और समर्थन के लिए हिस्सा लेने वाले देशों को धन्यवाद दिया।
एनएसए अजित डोभाल ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि मैं आज आपकी मौजूदगी और ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के आपके लगातार कमिटमेंट के लिए आप सभी का शुक्रिया अदा करता हूं। मौजूदा वैश्विक हालात को हाइलाइट करते हुए, उन्होंने कहा कि दुनिया एक खास तौर पर मुश्किल दौर से गुजर रही है, जिसमें हथियारों से जुड़ी लड़ाइयां, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आर्थिक दबाव और ऐसी विघटनकारी प्रौद्योगिकी का आना शामिल है जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के माहौल को बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि हम बहुत मुश्किल समय में मिल रहे हैं। दुनिया सैन्य झगड़ों और मुश्किल सुरक्षा समस्याओं से जूझ रही है। यह भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक दबाव और विघटनकारी प्रौद्योगिकी का सामना कर रही है। एनएसए अजित डोभाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने जो चुनौतियां हैं, वे तेजी से मुश्किल होती जा रही हैं और उन्हें मैनेज करना कठिन हो रहा है, जबकि मौजूदा संस्थागत फ्रेमवर्क और झगड़े सुलझाने के तरीके असरदार तरीके से जवाब देने में मुश्किल हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि न केवल खतरे और अधिक जटिल तथा आपस में जुड़े हुए होते जा रहे हैं, बल्कि उनसे निपटने या उनके प्रभाव को कम करने के लिए मौजूद साधन और संस्थागत तंत्र भी लगातार अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।
बहुपक्षीय सहयोग के कमजोर होने पर चिंता जताते हुए, एनएसए डोभाल ने कहा कि ग्लोबल सिस्टम में बहुपक्षवाद में गिरावट देखी जा रही है, ऐसे समय में जब मिलकर काम करने की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है। उन्होंने ब्रिक्स बनाने के पीछे के असली विजन को याद करते हुए कहा कि बहुपक्षावाद कम हो रहा है।
एनएसए अजित डोभाल के अनुसार, ब्रिक्स को उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के एक अनौपचारिक समूह के तौर पर सोचा गया था, जिसका मकसद ज्यादा “मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर” को बढ़ावा देना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय मामलों में ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करना था। उन्होंने कहा कि यह समूह ग्लोबल गवर्नेंस स्ट्रक्चर में सुधार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को बेहतर बनाने की उम्मीद पर भी बना है, ताकि वे आज की सच्चाई और विकासशील देशों के हितों को बेहतर ढंग से दिखा सकें।
अजित डोभाल ने ब्रिक्स को शांति, विकास, आर्थिक विकास और सहयोग की आम उम्मीदों से जुड़े देशों का एक “बहुत खास गठबंधन” बताया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर समूह के लगातार विस्तार और बढ़ते असर पर खुशी जताई। आज के वैश्विक माहौल में ब्रिक्स की अहमियत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि एक ऐसी दुनिया में हमारी खास भूमिका है जो उथल-पुथल में दिख रही है, जो बदलती दिख रही है, एक ऐसी दुनिया जिसमें झगड़े सुलझाने के तरीके शायद खत्म हो रहे हैं।
एनएसए अजित डोभाल ने अमेरिका और ईरान से जुड़े हाल के कूटनीतिक विकास का भी जिक्र किया और दोनों देशों के बीच कथित तौर पर हुए ज्ञापन समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत इस विकास को सावधानी से उम्मीद के साथ देख रहा है। उम्मीद है कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में सकारात्मक योगदान देगा। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह काम करेगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा में मदद मिलेगी। होर्मुज स्ट्रेट का खुलना एक बहुत अच्छी बढ़ोतरी है। इससे सप्लाई चेन की रुकावटें दूर होंगी और फर्टिलाइजर और केमिकल्स के क्षेत्र में कई कमियां दूर हो जाएंगी। इस क्षेत्र और उससे आगे के देशों को नेविगेशन की जो आजादी मिलेगी, उससे शायद हमारी आर्थिक खुशहाली में भी काफी सुधार होगा।
उभरती सुरक्षा चिंताओं को लेकर एनएसए डोभाल ने जोर दिया कि ब्रिक्स सदस्य देशों को उन बदलते खतरों के प्रति अलर्ट रहना चाहिए जो तेजी से राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर रहे हैं और जिनका पारंपरिक तरीकों से मुकाबला करना अक्सर मुश्किल होता है। उन्होंने बताया कि गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां ज्यादा जटिल और बदलने वाली हो गई हैं, जिससे पारंपरिक जवाब कम असरदार हो गए हैं। डोभाल ने कहा कि गैर-पारंपरिक खतरों ने देश की सीमाओं को पार कर लिया है और पारंपरिक जवाबों के खिलाफ हार के सिस्टम बना लिए हैं। नई विघटनकारी प्रौद्योगिकी, आतंकवाद के ज्यादा छिपे हुए रूप, साइबर खतरे, एक ऐसी दुनिया में जो तेजी से डिजिटाइज हो रही है, ये सभी हमारे लिए जरूरी खतरे हैं। आज, हम यहां अपनी सामूहिक बातचीत में इनमें से कुछ गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटेंगे।
एनएसए अजित डोभाल ने कहा कि मीटिंग में काउंटर-टेररिज्म और सूचना और संचार तकनीक के इस्तेमाल में सुरक्षा से जुड़े ब्रिक्स जॉइंट वर्किंग ग्रुप्स के नतीजों पर चर्चा होगी और तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में इन दोनों की अहमियत बढ़ गई है। भारत ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की अध्यक्षता कर रहा है, जिसमें सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर बातचीत करने और खास रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग को मजबूत करने के लिए एक साथ आ रहे हैं। ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख इस मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं।
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