प्रयागराज, 02 मार्च (जा)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रमुख सचिव (गृह) के रवैये की निंदा करते हुए कहा है कि राज्य सरकार के अधिकारियों को कोर्ट के आदेशों का पालन करना होगा और अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, इसमें अवमानना कार्रवाई भी है। अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा जा सकता है ताकि वे अपने व्यवहार और कोर्ट के आदेश की अवज्ञा की व्याख्या कर सकें। कोर्ट ने कहा कि यदि अधिकारियों के पास समय की कमी है तो उन्हें आवेदन दाखिल अतिरिक्त समय कारण बताते हुए मांगना चाहिए। आदेश का पालन दो स्थितियों में ही टाला जा सकता है, एक पालन असंभव हो दूसरा आदेश पर बड़ी कोर्ट से स्थगन हो। अन्यथा कोर्ट आदेश का पालन किया जाना चाहिए, पालन नहीं हो सका तो कारण बताया जाय। यह टिप्पणियां न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन की खंडपीठ ने जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाने वाली प्रयागराज निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला गुलाब कली की याचिका की सुनवाई करते हुए कीं। अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी।
विशेष परिस्थितियों में ही दर्ज हो सकता है पीड़िता का दोबारा बयान
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बीएनएसएस की धारा 183 के तहत पीड़ित का बयान दोबारा रिकार्ड करने का निर्देश केवल विशेष परिस्थितियों में ही दिया जा सकता है। यह निर्देश हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही दिया जा सकता है। कानून में एक बार बयान दर्ज करने का प्रविधान है। न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने आजमगढ़ निवासी कीर्ति वर्मा की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है।
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