पिछले माह ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें प्रशासक की दी गई भूमिका के बाद मामला अदालत में पहुंचा और इस आदेश पर रोक लगाने के क्रम में सरकार से जवाब मांगा गयाहै कि इन्हें प्रशासक बनाने की क्या आवश्यकता हो रही हैउसके बावजूद यूपी के प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार द्वारा प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाने का आदेश जारी करते हुए निर्देश दिए है कि प्रशासक के रूप में जिला पंचायत अध्यक्षों के पास सभी अधिकार होंगे। वैसे तो कब क्या होना चाहिए यह देखना सरकार का काम है क्योंकि देश के विकास और जनहित की येाजनाओं को लागू कराने की जिम्मेदारी उसी पर है मगर इस बारे में खबर पढ़कर नागरिकों का यह कथन भी सही है कि सरकार जिला पंचायतों के अध्यक्षों के समाप्त हो रहे कार्यकाल के उपरांत तुरंत चुनाव कराए या इस बारे में अदालत से निर्णय ले लेकिन ग्राम प्रधानों के संदर्भ में आए आदेश के बाद जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक घोषित किया जाना ठीक नहीं कह सकते। क्योंकि भविष्य में जैसे ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने को लेकर मामला अदालत गया वैसे ही जिला पंचायत अध्यक्षों कोप्रशासक बनाने का मुददा उठ सकता है। नागरिकों का कहना है कि ऐसे प्रकरणों में अफसरों के समय और विकास के पैसे की बर्बादी होती है क्येांकि चुनाव तो होने ही है तो समय से क्यों ना कराए जाए वो भी ऐसे समय पर जब निर्वाचन आयोग एक देश एक चुनाव कराने कीतैयारी में लगा है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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