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    Home»देश»नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया द्वारा डोनाल्ड ट्रंप को पुरस्कार देने पर
    देश

    नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया द्वारा डोनाल्ड ट्रंप को पुरस्कार देने पर

    adminBy adminJanuary 19, 2026No Comments1 Views
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    1901 में नार्वे के मूर्तिकार गुस्ताव विगलैंड द्वारा डिजायन 18 कैरेट सोने के 196 ग्राम वजन और व्यास ६.६ सेंटीमीटर का नोबेल पुरस्कार पदक के एक ओर अल्फ्रेड नोबेल की आकृति और दूसरी और शांति और भाईचारे का प्रतीक अंकित होता है। नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था नोबेल फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि यह पुरस्कार किसी अन्य व्यक्ति को आधिकारिक रूप से दिया या साझा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि नोबेल शांति पुरस्कार के साथ दिया जाने वाला स्वर्ण पदक और प्रमाण पदक भौतिक स्वरूप होता है और असली सम्मान उसी व्यक्ति से जुड़ा होता है जिसे विजेता घोषित किया गया है। पदक डिप्लोमा व पुरस्कार राशि दिए जाने के बाद आगे क्या होता है इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि इसका विजेता वही माना जाता है जिसका नाम आधिकारिक रूप से घोषित हुआ है। बताते चलें कि नोबेल पुरस्कार जिसे दिए जाते हैं उसे दो मुख्य प्रतीक मिलते हैं एक स्वर्ण पदक और एक डिप्लोमा व पुरस्कार राशि अलग से प्रदान की जाती है। इससे संबंध समिति का कहना है कि यह पुरस्कार घोषित होने के बाद वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि यह फैसला हमेशा के लिए होता है।
    वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना द्वारा पुरस्कार का पदक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौपने के बाद यह बात स्पष्ष्ट हुई लेकिन एक खबर के अनुसार यह पहला मौका नहीं है पहले भी नोबेल पुरस्कार बेचे व दान किए जाते रहे हैं। सवाल यह उठता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में है। उन्होंने और उनके सहयोगियों ने यह पुरस्कार प्राप्त करने के लिए हर प्रयास किए जो सफल नहीं हो पाए। उसके बावजूद उनके द्वारा इसे स्वीकार किया जाना ही मानवीय और सामाजिक दृष्टिकोण से सही नहीं कहा जा सकता। स्मरण रहे कि २००१ के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कोफी अन्नान के निधन के बाद उनकी पत्नी ने फरवरी २०२४ में उनका पदक और डिप्लोमा जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को दान कर दिया था। वर्ष १९२१ के शांति पुरस्कार विजेता क्रिचियन लूस लांगे का पदक २००५ ओस्लो के नोबेल शांति केंद्र में प्रदर्शित है जो नार्वे में सार्वजनिक रूप से रखा गया एकमात्र मूल शांति पदक है। २०२१ के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दीमित्री ने जून २०२२ में अपना पदक बेचकर पूरी राशि यूक्रेन के शरणार्थी बच्चों के लिए दान कर दी थी। भौतिकी के नोबेल विजेता के परिवार ने उनका पदम दि कैंब्रिज विवि को दान कर दिया था ताकि छात्रों को वो प्रेरित कर सके। यह चारों पुरस्कार हस्तांतरण करने या प्रदर्शन करने के मामले जनहित के कहे जा सकते हैं जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह पुरस्कार पदक मारिया कोरिना से लेना सही नहीं कह सकते। कुछ लोगों का यह कहना नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि स्वयं को पुरस्कार ना मिलने पर उसकी चाहत पूरी करने को यह पुरस्कार लिया गया हो सकता है।
    मेरा मानना है कि इसे देने वाली समिति के द्वारा जो तथ्य प्रदर्शित किए गए हैं उन्हें देखते हुए नोबेल समिति की ओर से भविष्य में एक नियम बनाया जाए कि अगर कोई नोबेल विजेता किसी और को देता है तो उससे वो वापस लेकर किसी और पात्र व्यक्ति को दिया जाए। कानून बनाया जाए कि विजेता किसी दूसरे को हस्तांतरित ना कर सके।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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